कोरबा, 07 सितम्बर। Korba Mining Area : कोरबा जिले के खनन प्रभावित गांवों में विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा फोकस किया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सलोरा, जेन्जरा, हुंकरा, धवईपुर, देवरी और तेलसरा में चौपाल लगाकर सरपंचों, पंचों और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने गांवों की समस्याएं सुनीं और शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली, रोजगार समेत बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
स्वीकृत काम पूरे करें, नए प्रस्ताव लाएं; DMF से विकास कार्यों को मिलेगी मंजूरी
कलेक्टर दुदावत ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि गांव के समग्र विकास के लिए प्राथमिकता के आधार पर एक समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए। जरूरी विकास कार्यों को जिला खनिज न्यास (DMF) मद से स्वीकृति देने की बात कही गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ काम को समय पर पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी निर्धारित मापदंडों के अनुरूप होनी चाहिए। कलेक्टर ने कहा कि पंचायतें स्वीकृत कार्यों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करें और नए कार्यों के प्रस्ताव लगातार भेजती रहें, ताकि विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ती रहे।
पानी, सड़क, स्कूल से लेकर बिजली तक; ग्रामीणों की मांगों पर कार्रवाई के निर्देश
चौपाल में ग्रामीणों ने जर्जर स्कूल और आंगनबाड़ी भवनों की मरम्मत, सीसी सड़क, पुल, सोलर लाइट, हैंडपंप, खराब बोर की मरम्मत, ट्रांसफार्मर बदलने और तालाब में पचरी निर्माण जैसी मांगें रखीं। पेयजल संकट वाले इलाकों में बोर, सोलर ड्यूल पंप और हैंडपंप लगाने पर भी सहमति दी गई।
ग्रामीणों ने शादी-विवाह और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए मंगल भवन की मांग भी रखी। इस पर कलेक्टर ने अलग-अलग वार्डों में छोटे भवन बनाने के बजाय गांव के प्रमुख स्थान पर ग्रामीणों की सहमति से एक बड़े सामुदायिक भवन के प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही।
इसके अलावा पट्टा निरस्तीकरण, राशन दुकान में चावल नहीं मिलने, शौचालय और प्रधानमंत्री आवास, मजदूरी भुगतान तथा अवैध शराब बिक्री से जुड़ी शिकायतें भी सामने आईं। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।
जल जीवन मिशन पर सख्ती: घर-घर पानी पहुंचेगा, तभी होगा भुगतान
कलेक्टर ने जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि गांवों में घर-घर पेयजल आपूर्ति शुरू होने और उसका सत्यापन होने के बाद ही संबंधित कार्यों का भुगतान किया जाएगा। ठेकेदारों को तीन माह की समय-सीमा में पानी की आपूर्ति शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने पंचायतों को यह सुझाव भी दिया कि पेयजल व्यवस्था शुरू होने के बाद उसके संचालन और रखरखाव के लिए पंचायत स्तर पर न्यूनतम शुल्क की व्यवस्था की जा सकती है। इससे बिजली बिल, पंप की मरम्मत या अन्य आकस्मिक जरूरतों के समय पंचायत के पास आवश्यक राशि उपलब्ध रहेगी।
बच्चों की पढ़ाई से महिलाओं के रोजगार तक, गांवों में आत्मनिर्भरता पर जोर
कलेक्टर ने ग्रामीण अभिभावकों से बच्चों को 12वीं के बाद कॉलेज भेजने की अपील की। उन्होंने बताया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए जिला प्रशासन की ओर से सहयोग दिया जा रहा है। 10वीं के बाद NEET और JEE की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए आवासीय कोचिंग की व्यवस्था की गई है। बड़े सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों की फीस वहन करने के लिए भी प्रशासन की ओर से सहयोग की बात कही गई।
महिलाओं को लाइवलीहुड कॉलेज के माध्यम से सिलाई समेत विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की जा रही है। स्व-सहायता समूहों के लिए दोना-पत्तल मशीन, साबुन निर्माण, स्कूल ड्रेस सिलाई, बर्तन बैंक और सेंटरिंग कार्य जैसे रोजगार विकल्पों पर प्रशिक्षण और सामग्री उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया।
कलेक्टर ने सौर ऊर्जा अपनाने के लिए भी ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया। वहीं किसानों से धान विक्रय के लिए आवश्यक पंजीयन समय पर कराने की अपील की गई। नए किसानों तथा जिनके पट्टे या रकबे में बदलाव हुआ है, उन्हें 30 सितंबर तक पंजीयन कराने की सलाह दी गई। किसानों से 2 अक्टूबर की ग्राम सभा में उपस्थित रहकर गिरदावरी के दौरान आवश्यक आपत्ति दर्ज कराने की भी अपील की गई। कलेक्टर ने कहा कि खनन प्रभावित गांवों का विकास सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पेयजल, सड़क, बिजली और आजीविका के अवसर मजबूत करते हुए गांवों को आत्मनिर्भर और बेहतर सुविधाओं से युक्त बनाना जिला प्रशासन का लक्ष्य है।












