Korba PM Awas Scam : ‘स्वर्ग’ में PM आवास घोटाले पर पहली बड़ी कार्रवाई, ग्राम सचिव निलंबित, ब्लॉक समन्वयक अटैच, पूर्व सरपंच की भी बढ़ी मुश्किल

News Power Zone
8 Min Read
Korba PM Awas Scam

कोरबा, 25 अगस्त। Korba PM Awas Scam :  कोरबा जनपद पंचायत के सांसद आदर्श ग्राम पंचायत तिलकेजा में कथित PM आवास घोटाले की शिकायत के बाद प्रशासन ने पहली बड़ी कार्रवाई की है। प्रारंभिक जांच के आधार पर जिला पंचायत CEO ने ग्राम पंचायत सचिव नविता दूबे को निलंबित कर दिया है। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के ब्लॉक समन्वयक देवानंद श्रीवास को जिला पंचायत की PM आवास शाखा में अटैच किया गया है। मामले में करीब 48 अपात्र हितग्राहियों के नाम पर आवास स्वीकृत कर राशि आहरित किए जाने की शिकायत सामने आई है।

48 अपात्र हितग्राहियों के नाम पर PM आवास का आरोप

शिकायत के मुताबिक तिलकेजा पंचायत में करीब 48 ऐसे हितग्राहियों के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ स्वीकृत किया गया, जो कथित तौर पर पात्र नहीं थे। शिकायत में करीब 11 हितग्राहियों के मृत होने का भी दावा किया गया है। आरोप है कि इन मृतकों के नाम पर भी आवास की पहली किश्त की राशि जारी और आहरित की गई।

11 मृतकों के नाम पर 40-40 हजार की किश्त का दावा

शिकायतकर्ता जितेंद्र साहू के मुताबिक मामला करीब 55 कथित हितग्राहियों से जुड़ा है, जिनमें 11 मृतक बताए जा रहे हैं। आरोप है कि मृतक हितग्राहियों के नाम पर PM आवास की पहली किश्त के रूप में 40-40 हजार रुपये तक की राशि निकाली गई। इस हिसाब से केवल पहली किश्त की कथित राशि करीब 22 लाख रुपये तक पहुंचती है। हालांकि शिकायत में 55 और जिला पंचायत स्तर पर सामने आए 48 अपात्र हितग्राहियों की संख्या अलग-अलग है। वास्तविक संख्या विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

फर्जी ग्रामसभा से अपात्रों को पात्र बनाने का आरोप

मामले का सबसे गंभीर आरोप कथित फर्जी ग्रामसभा से जुड़ा है। आरोप है कि पूर्व वर्षों में PM आवास के लिए अपात्र घोषित किए गए कुछ ग्रामीणों को बाद में ग्रामसभा के माध्यम से पात्र बना दिया गया। अब जांच टीम ग्रामसभा की कार्यवाही, प्रस्ताव और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच करेगी।

CEO प्रतीक जैन ने क्या कहा?

जिला पंचायत कोरबा के CEO IAS प्रतीक जैन के अनुसार तिलकेजा ग्राम पंचायत में 48 अयोग्य हितग्राहियों के नाम पर PM आवास स्वीकृत होने और राशि आहरित किए जाने की शिकायत मिली थी। प्रथम दृष्टया गड़बड़ी पंचायत स्तर से शुरू होती दिखाई दे रही है। इसी आधार पर सचिव को निलंबित किया गया है और ब्लॉक समन्वयक को जिला पंचायत अटैच किया गया है।

तीन सदस्यीय टीम करेगी पूरे मामले की जांच

मामले की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। जांच में हितग्राहियों की पात्रता, ग्रामसभा के रिकॉर्ड, बैंक खातों, आधार कार्ड, भुगतान विवरण और PM आवास से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। CEO के अनुसार यदि जांच में आरोप और जिम्मेदारी सिद्ध होती है तो राशि की वसूली के साथ संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई जा सकती है।

जांच में सहयोग नहीं करने पर सचिव निलंबित

निलंबन आदेश के अनुसार जांच समिति ने तिलकेजा के सरपंच और सचिव को 48 हितग्राहियों के बैंक खाते, आधार कार्ड, बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी रजिस्टर सहित संबंधित दस्तावेजों के साथ 13 अगस्त को उप संचालक पंचायत कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि निर्धारित तिथि पर दोनों उपस्थित नहीं हुए।

इसके बाद सचिव नविता दूबे को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया, लेकिन आदेश के मुताबिक उन्होंने नोटिस का जवाब भी नहीं दिया। जांच में सहयोग नहीं करने और शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता को आधार बनाते हुए उन्हें निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जनपद पंचायत कोरबा निर्धारित किया गया है।

ब्लॉक समन्वयक भी जांच के दायरे में

PM आवास योजना में ग्राम स्तर पर आवास मित्र और जनपद स्तर पर ब्लॉक समन्वयक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जांच के दौरान ब्लॉक समन्वयक देवानंद श्रीवास ने जांच टीम के सामने अपना बयान दिया था। इसके बाद उनके ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की बात सामने आई। फिलहाल उन्हें जिला पंचायत की PM आवास शाखा में अटैच किया गया है।

दूसरे खातों में पहुंची PM आवास की रकम

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायत के मुताबिक कुछ कथित अपात्र हितग्राहियों के बजाय PM आवास की पहली किश्त दूसरे बैंक खातों में पहुंचने की बात कही जा रही है। आरोप है कि राशि दूसरे खातों में पहुंचने के बाद संबंधित खाताधारकों से संपर्क कर इसे पंचायत की गलती बताते हुए वापस मांगा गया।

कुछ मामलों में कथित तौर पर कमीशन दिए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बैंक रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राशि वास्तव में किन खातों में पहुंची और उसका इस्तेमाल किसने किया।

पंचायत के दस्तावेज गायब होने का भी आरोप

जांच के दौरान पंचायत से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया है कि कथित गड़बड़ी से जुड़े दस्तावेज गायब किए गए हैं। फर्जी ग्रामसभा के आरोपों के बीच अब ग्रामसभा की कार्यवाही और दस्तावेजों की उपलब्धता भी जांच का अहम हिस्सा बन गई है।

अब जांच का दायरा केवल निलंबित सचिव और ब्लॉक समन्वयक तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। यदि जांच में कथित फर्जी ग्रामसभा, अपात्र हितग्राहियों की पात्रता बदलने या राशि के गलत भुगतान की पुष्टि होती है, तो पूर्व सरपंच, आवास मित्र, पंचों और पंचायत से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अपात्र लोगों को कथित तौर पर ग्रामसभा के जरिए पात्र बनाया गया और उनके नाम पर सरकारी राशि जारी हुई, तो इस प्रक्रिया में जिम्मेदारी किसकी थी। जांच समिति द्वारा ग्रामसभा रिकॉर्ड, हितग्राही सूची, बैंक भुगतान, PM आवास पोर्टल और अन्य दस्तावेजों का मिलान किए जाने के बाद तस्वीर साफ हो सकती है।

फिलहाल ग्राम पंचायत सचिव पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है और PM आवास ब्लॉक समन्वयक को जिला पंचायत अटैच किया गया है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं कि कथित PM आवास घोटाले में अगली कार्रवाई किसके खिलाफ होती है और सरकारी राशि के कथित गलत भुगतान की वास्तविकता क्या सामने आती है।

Share This Article