BSP High Court : जमानत लंबित थी, फिर भी पुलिस ने दो आरोपियों को बताया ‘फरार’, इनाम बढ़ाने पर कोर्ट नाराज, SP को किया तलब

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BSP High Court

बिलासपुर, 23 अगस्त। BSP High Court : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कोरिया पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए तत्कालीन कोरिया एसपी रवि कुमार कुर्रे को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है। मामला बैकुंठपुर में नाबालिग बालिका की आत्महत्या से जुड़े प्रकरण में जगत कुमार बैद और दीपक बैद की जमानत याचिका से जुड़ा है।

हाई कोर्ट में दोनों आरोपियों की जमानत याचिका लंबित रहने के दौरान कोरिया पुलिस ने अपनी वेबसाइट और प्रेस विज्ञप्ति में उन्हें ‘फरार’ बताते हुए गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया। बाद में इनाम की राशि भी बढ़ा दी गई। कोर्ट ने पुलिस की इसी कार्रवाई के अधिकार और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

पहले 5 हजार का इनाम, फिर बढ़ाकर ₹10 हजार

पुलिस की 10 जुलाई 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, बैकुंठपुर थाने में अपराध दर्ज होने के बाद विनोद बैद, जगत कुमार बैद और दीपक बैद को घटना के बाद से फरार बताया गया था। तीनों की गिरफ्तारी में मदद करने वाले व्यक्ति को ₹5,000 का नकद इनाम देने की घोषणा की गई थी।

बाद में पुलिस ने दूसरी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जगत कुमार बैद और दीपक बैद पर घोषित इनाम को ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 कर दिया।

यही कार्रवाई अब हाई कोर्ट के सवालों के घेरे में है।

कोर्ट ने पूछा- इनाम बढ़ाने का अधिकार किस आधार पर?

21 अगस्त की सुनवाई में अदालत को बताया गया कि कोरिया पुलिस की वेबसाइट पर दोनों याचिकाकर्ताओं को फरार बताया गया है, जबकि उनकी जमानत कार्यवाही हाई कोर्ट में लंबित थी।

इस पर कोर्ट ने तत्कालीन एसपी रवि कुमार कुर्रे से पूछा है कि प्रेस विज्ञप्ति जारी करने से पहले पुलिस ने किन तथ्यों और साक्ष्यों का सत्यापन किया था।

कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि:

क्या पुलिस ने यह सत्यापित किया था कि दोनों की अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट में लंबित है? क्या इस संबंध में महाधिवक्ता कार्यालय से जानकारी ली गई थी? इनाम की राशि बढ़ाने और प्रेस विज्ञप्ति जारी करने का कानूनी अधिकार किस प्राधिकारी के तहत इस्तेमाल किया गया? अदालत ने तत्कालीन एसपी को शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

CCTV का DVR जब्त, लेकिन FSL नहीं भेजा गया

मामले की जांच को लेकर कोर्ट ने एक और गंभीर सवाल उठाया है। घटना 7 जुलाई 2026 की बताई गई है। पुलिस ने 10 जुलाई को CCTV का DVR जब्त किया था, लेकिन 21 अगस्त तक DVR को फॉरेंसिक जांच के लिए FSL नहीं भेजा गया था।

हाई कोर्ट ने DVR की स्थिति और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। राज्य को संबंधित अधिकारी तक आदेश की प्रति पहुंचाकर DVR को फॉरेंसिक लैब भेजने और अगली सुनवाई से पहले उसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कराने को कहा गया है।

पीड़िता के पिता और चाचा को जांच से दूर रखने का आदेश

हाई कोर्ट ने मामले की जांच की निष्पक्षता को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने अभियोजन को सुनिश्चित करने कहा है कि पीड़िता के पिता, जो आरक्षक हैं, और चाचा, जो उप निरीक्षक हैं, मामले की जांच में किसी भी तरह शामिल न हों। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि दोनों के जांच में शामिल होने की बात सामने आती है, तो मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।

5 अगस्त की सुनवाई में भी पुलिस पर उठे थे सवाल

इस मामले में 5 अगस्त की सुनवाई के दौरान भी हाई कोर्ट ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उस दौरान पीड़िता के पिता अदालत में उपस्थित हुए थे और दोनों आरोपियों को जमानत दिए जाने का विरोध किया था।

पुलिस की कार्रवाई को लेकर सामने आए आरोपों के बाद कोर्ट ने कोरिया एसपी को तलब करते हुए FIR दर्ज करने से पहले अभियोजन द्वारा जुटाई गई जानकारी और तथ्यों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

8 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। उस दिन तत्कालीन एसपी रवि कुमार कुर्रे का स्पष्टीकरण, पुलिस का शपथ पत्र और CCTV DVR की FSL रिपोर्ट अदालत के सामने रखी जानी है।

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