Korba News : ग्रामीणों के दबाव का असर? मानिकपुर खदान विस्तार की जनसुनवाई स्थगित, 500 से ज्यादा ग्रामीणों ने किया था विरोध
Korba News : मानिकपुर खदान विस्तार की जनसुनवाई स्थगित, 500+ ग्रामीणों की एकजुटता के बाद SECL का बड़ा फैसला
कोरबा, 19 अगस्त। Korba News : मानिकपुर ओपन कास्ट परियोजना के प्रस्तावित विस्तार को लेकर ग्रामीणों और SECL प्रबंधन के बीच जारी गतिरोध अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई स्थगित कर दी गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मानिकपुर खदान विस्तार से प्रभावित 8 गांवों के 500 से अधिक ग्रामीण एकजुट होकर जनसुनवाई का विरोध करने का ऐलान कर चुके थे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया था कि जब तक उनकी लंबित मांगों का समाधान नहीं होता, वे जनसुनवाई का विरोध जारी रखेंगे।
हालांकि, जनसुनवाई स्थगित होने को ग्रामीणों के विरोध का परिणाम माना जा रहा है, लेकिन SECL ने इसे किस आधार पर स्थगित किया, इसकी आधिकारिक वजह अलग से स्पष्ट होना बाकी है।
मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की मांग
मानिकपुर खदान विस्तार से प्रभावित ग्रामीण लंबे समय से कई मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- उचित और न्यायपूर्ण मुआवजा
- प्रभावित परिवारों का पुनर्वास
- पात्र परिवारों को रोजगार
- छूटे हुए मकानों को पात्रता में शामिल करना
- छूटे हुए परिवारों को अधिकारों का लाभ
- अन्य लंबित पुनर्वास एवं विस्थापन संबंधी मांगें शामिल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन परियोजना का विरोध उनका उद्देश्य नहीं है, बल्कि वे अपनी जमीन, मकान, रोजगार और भविष्य के अधिकारों को लेकर समाधान चाहते हैं।
500 से ज्यादा ग्रामीणों ने एकजुट होकर लिया था फैसला
भिलाईखुर्द क्रमांक-1 में हुई बैठक में प्रभावित 8 गांवों के 500 से अधिक ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपना रुख स्पष्ट किया था।
ग्रामीणों ने कहा था कि लंबित मांगों का समाधान किए बिना जनसुनवाई में आगे बढ़ना स्वीकार नहीं होगा। इसके बाद 21 अगस्त को प्रस्तावित जनसुनवाई के स्थगित होने से प्रभावित गांवों में उम्मीद जरूर जगी है।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल बोले- स्थगन राहत है, समाधान नहीं
जनसुनवाई स्थगित होने पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इसे ग्रामीणों के लिए तत्काल राहत बताया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि केवल जनसुनवाई टलना समस्या का अंतिम समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी एकजुटता दिखाई है। अब SECL प्रबंधन को मिले समय का इस्तेमाल प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए किया जाना चाहिए।
‘सिर्फ जनसुनवाई स्थगित करना पर्याप्त नहीं’
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और पात्रता से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में प्रबंधन को प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि प्रत्येक समस्या पर चर्चा कर समयबद्ध समाधान निकाला जाए, ताकि अगली जनसुनवाई से पहले विवाद की स्थिति खत्म हो सके।
विकास का विरोध नहीं, अधिकारों की लड़ाई: अग्रवाल
पूर्व मंत्री ने कहा कि ग्रामीणों का उद्देश्य विकास या खनन परियोजनाओं का विरोध करना नहीं है। उनका संघर्ष अपनी जमीन, मकान, रोजगार और भविष्य के अधिकारों को लेकर है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा, पुनर्वास और उनके वैधानिक अधिकार मिलना जरूरी है।
अब गेंद SECL के पाले में
जनसुनवाई का स्थगन भले ही ग्रामीणों के लिए फिलहाल राहत लेकर आया हो, लेकिन असली चुनौती अब SECL प्रबंधन के सामने है।ग्रामीणों की मांग है कि अगली जनसुनवाई से पहले लंबित मामलों पर ठोस कार्रवाई हो। वहीं पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने भी टकराव की जगह संवाद और विश्वास का वातावरण बनाने की अपील की है।















