
₹10 से ₹40 प्रति टन कथित कलेक्शन की चर्चा ने बढ़ाई सनसनी, आखिर किसके इशारे पर चल रहा ‘लेवी’ का खेल?
कोरबा।Kusmunda Coal Levy Case देशभर में पवित्र सावन महीने में ‘बोल बम’ की गूंज सुनाई दे रही है, लेकिन एशिया की शान कही जाने वाली कुसमुंडा कोयला खदान में इन दिनों ‘कोल बम’ की गूंज चर्चा में है। कुसमुंडा की कोयला खदानों से निकलने वाले कोयले के साथ अब एक और कहानी सुर्खियों में है। कोयला परिवहन के बीच कथित ‘कोल लेवी’ यानी प्रति टन प्रोटेक्शन मनी की वसूली की चर्चाओं ने SECL के रोड सेल सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सूत्र इस कथित कलेक्शन नेटवर्क में रोड सेल से जुड़े एक अधिकारी की भूमिका को बेहद अहम बता रहे हैं।
₹10 से ₹40 प्रति टन कलेक्शन की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, सामान्य कोयले पर करीब ₹10 प्रति टन और स्टीम कोयले पर करीब ₹40 प्रति टन तक कथित कलेक्शन की चर्चा है। यदि यह दावा सही है, तो रोजाना होने वाले बड़े पैमाने के कोयला परिवहन के हिसाब से कथित वसूली का आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है।
यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ कथित वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी पूछा जा रहा है कि इस कथित कलेक्शन सिस्टम को कौन संचालित कर रहा है और रकम आखिर किस तक पहुंच रही है?
कौन चला रहा है ‘लेवी’ का खेल?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि परिवहनकर्ताओं से कथित तौर पर प्रति टन रकम वसूलने का यह सिस्टम आखिर किसके इशारे पर चल रहा है?सूत्रों का दावा है कि रोड सेल से जुड़े एक अधिकारी की भूमिका इस पूरे कथित नेटवर्क में महत्वपूर्ण है और उसे ही कथित तौर पर ‘किंगपिन’ के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी अथवा SECL प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना बाकी है।
‘डायरी’ में दर्ज है कलेक्शन का हिसाब?
इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज चर्चा कथित ‘डायरी’ को लेकर है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, कथित कलेक्शन और लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण हिसाब-किताब की जानकारी एक डायरी में दर्ज होने की चर्चा है।
यदि ऐसी कोई डायरी वास्तव में मौजूद है और उसमें कथित लेवी का हिसाब दर्ज है, तो वह इस पूरे मामले की कई परतें खोल सकती है।
सवाल यह है कि डायरी में किन लोगों के नाम हैं? कितनी रकम का हिसाब दर्ज है? किससे रकम ली गई और कथित तौर पर रकम आगे किस तक पहुंची?यही सवाल अब पूरे मामले को और गंभीर बना रहे हैं।
₹10 और ₹40 की ‘रेट लिस्ट’ किसने तय की?
कथित कलेक्शन को लेकर सामने आ रही चर्चाओं में दो आंकड़े सबसे ज्यादा चर्चा में हैं:
– सामान्य कोयला: करीब ₹10 प्रति टन
– स्टीम कोयला: करीब ₹40 प्रति टन
अगर वास्तव में ऐसी कोई तय दर लागू है, तो सवाल यह भी है कि इन दरों को तय करने वाला कौन है और कथित वसूली की निगरानी कौन करता है?
क्या यह किसी आधिकारिक शुल्क का हिस्सा है? यदि नहीं, तो परिवहनकर्ताओं से कथित तौर पर यह राशि किस आधार पर ली जा रही है? क्या इसकी कोई रसीद दी जाती है? और सबसे अहम सवाल, इस रकम का हिसाब-किताब कहां दर्ज होता है?
रोड सेल सिस्टम की भूमिका पर उठे सवाल
SECL की खदानों से कोयला परिवहन की व्यवस्था में रोड सेल महत्वपूर्ण कड़ी है। ऐसे में कथित लेवी वसूली की चर्चाओं ने रोड सेल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका इस तरह की कथित वसूली में सामने आती है, तो मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा। यह जांच का विषय होगा कि क्या कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है और क्या इस कथित कलेक्शन की जानकारी किसी उच्च स्तर के जिम्मेदार अधिकारी को थी?
‘कोल बम’ फटेगा या दब जाएगा मामला?
कुसमुंडा में कथित कोल लेवी की चर्चा ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित पक्ष को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि आरोपों में सच्चाई है तो निष्पक्ष जांच के जरिए पूरे कथित नेटवर्क की परतें खोलना जरूरी है।
अब नजरें SECL प्रबंधन और संबंधित जांच एजेंसियों पर हैं। क्या कथित लेवी की जांच होगी? क्या रोड सेल से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल होगी? क्या कथित डायरी की जांच की जाएगी? और अगर डायरी में वास्तव में कोई हिसाब-किताब दर्ज है, तो क्या उसमें छिपे नाम सामने आएंगे?
कुसमुंडा के कोयले के बीच उठे इस कथित ‘लेवी कांड’ में असली सवाल सिर्फ ₹10 या ₹40 प्रति टन का नहीं है। असली सवाल यह है कि कथित कलेक्शन की चाबी किसके हाथ में है और उस चाबी से खुलने वाली ‘डायरी’ में आखिर कौन-कौन से राज दफन हैं?





