रायपुर

IAS Controversy : सांसद बृजमोहन-IAS अमित कटारिया विवाद में नई एंट्री…! पूर्व सांसद जयश्री बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र…108 एंबुलेंस टेंडर की जांच की मांग

पूर्व सांसद जयश्री बनर्जी ने ओम बिरला से की निष्पक्ष जांच की मांग

रायपुर, 09 अगस्त। IAS Controversy : छत्तीसगढ़ में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और स्वास्थ्य सचिव IAS अमित कटारिया के बीच चल रहा विवाद अब और तूल पकड़ता नजर आ रहा है। इस मामले में अब मध्यप्रदेश की पूर्व सांसद और पूर्व कैबिनेट मंत्री जयश्री बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पूर्व सांसद ने न सिर्फ सांसद की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है, बल्कि अमित कटारिया के कार्यकाल में 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर को लेकर सामने आए कथित अनियमितताओं के आरोपों की भी जांच कराने की मांग की है।

20 मई को शुरू हुआ था विवाद

बताया गया कि सांसद बृजमोहन अग्रवाल और स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के बीच विवाद 20 मई 2026 को शुरू हुआ था। सांसद का कहना था कि जनहित से जुड़े उनके कई पत्रों और स्मरण पत्रों का लंबे समय से जवाब नहीं दिया जा रहा था।

इसी सिलसिले में उन्होंने मोबाइल फोन पर स्वास्थ्य सचिव से जानकारी चाही। सांसद का आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें अपेक्षित जानकारी देने के बजाय अधिकारी से विवाद की स्थिति बन गई।

बृजमोहन अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि बातचीत के दौरान अमित कटारिया ने कथित तौर पर उनसे ‘जो करना है कर लो’ कहा। इसके बाद सांसद ने इस व्यवहार को जनप्रतिनिधि के विशेषाधिकार और निर्धारित प्रोटोकॉल से जोड़ते हुए लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की थी।

अब पूर्व सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

जयश्री बनर्जी ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजा। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से सांसद बृजमोहन अग्रवाल की ओर से अमित कटारिया के खिलाफ की गई शिकायत की जानकारी मिली।

उन्होंने मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

108 एंबुलेंस टेंडर भी जांच के घेरे में?

पूर्व सांसद ने अपने पत्र में स्वास्थ्य विभाग की 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी और अनियमितताओं के आरोपों की जांच की मांग की है।

उनका कहना है कि 108 एंबुलेंस सेवा सीधे आम लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी है। ऐसे में यदि टेंडर प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

सांसद बनाम ब्यूरोक्रेसी विवाद ने फिर उठाए सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संवाद, समन्वय और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।

सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी जनता से जुड़े मुद्दों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना है, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों पर सरकारी नीतियों और योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी होती है।

ऐसे में जब किसी सांसद और IAS अधिकारी के बीच विवाद सार्वजनिक होता है, तो मामला सिर्फ एक फोन कॉल या व्यक्तिगत मतभेद तक सीमित नहीं रहता। इससे यह सवाल भी उठता है कि जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय हो और प्रशासनिक व्यवस्था में संवाद को और प्रभावी कैसे बनाया जाए।

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