
Tarun Tejpal Rape Case: मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने आज गुरुवार को मापुसा की सेशंस कोर्ट का वह फैसला रद्द कर दिया, जिसमें नवंबर 2013 में एक जूनियर महिला सहकर्मी द्वारा दर्ज कराए गए रेप केस में ‘तहलका’ मैगजीन के एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बरी कर दिया गया था।
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कोर्ट ने तेजपाल का सही ढंग से ट्रायल नहीं किया, बल्कि इसकी जगह ‘पीड़िता का ही ट्रायल’ कर दिया। जस्टिस डॉक्टर नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसंडेकर की डिवीजन बेंच ने गोवा सरकार की अपील मंजूर करते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया. अब सजा पर अलग से सुनवाई होगी।
Tarun Tejpal Rape Case: फैसले के समय कोर्ट में मौजूद थे तेजपाल
कोर्ट की ओर से फैसला सुनाए जाते समय तेजपाल भी अदालत में मौजूद थे, क्योंकि बेंच ने फैसले के लिए मामला सुरक्षित रखते समय उन्हें फैसला सुनाए जाने के दौरान मौजूद रहने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट की बेंच ने राज्य की CID की ओर से दाखिल अपील पर फैसला सुनाया, जिसका प्रतिनिधित्व सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने किया।
Tarun Tejpal Rape Case:लिफ्ट में यौन उत्पीड़न करने का आरोप
यह मामला उस रेप केस से जुड़ा है, जिसमें तहलका की एक जूनियर महिला सहकर्मी की ओर से गोवा में आयोजित पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में तेजपाल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया गया कि सेशंस कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों की जांच करने की जगह पीड़िता के ‘घटना के बाद’ के व्यवहार, प्रतिक्रियाओं और उसके बैकग्राउंड का आकलन किया. साथ ही यह तर्क भी दिया गया कि कोर्ट ने असल में तेजपाल के खिलाफ सही ढंग से ट्रायल करने की जगह ‘पीड़िता का ही ट्रायल’ कर दिया।
सुनवाई के दौरान यह दलील भी दी गई कि ट्रायल कोर्ट ने अहम सबूतों को नजरअंदाज किया, जैसे कि तेजपाल का वह ‘माफी से जुड़ा ई-मेल’ जो उन्होंने पीड़िता को तब यह मेल किया था जब उसने कंपनी के तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर से यौन शोषण को लेकर उनके खिलाफ शिकायत की थी।






