
कोरबा/बिलासपुर।SECL Check Off System एसईसीएल की श्रमिक राजनीति में अंदरखाने चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। चेक ऑफ सिस्टम को लेकर शुरू हुई लड़ाई अब केवल सदस्यता शुल्क कटौती तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसे श्रमिक संगठनों के राजनीतिक वजूद और प्रभाव की लड़ाई माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, आगामी श्रमिक समीकरणों को देखते हुए विभिन्न यूनियनें अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र को मजबूत करने में जुटी हैं। इसी बीच कोयला मजदूर पंचायत (एचएमएस) ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया है कि वर्ष 2022 से चेक ऑफ सिस्टम का हिस्सा होने के बावजूद उसे मुख्यालय स्तर की महत्वपूर्ण बैठकों और समितियों से दूर रखा जा रहा है।
संगठन के महामंत्री विनय सिंह ने निदेशक (मानव संसाधन) को भेजे पत्र में कहा है कि यह न केवल भेदभावपूर्ण रवैया है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भावना के भी विपरीत है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंजीकृत ट्रेड यूनियनों को सदस्यता शुल्क कटौती के लिए अधिकृत पत्र देने का अधिकार है और वेज कोड-2019 तथा वेज कोड सेंट्रल रूल्स-2026 में इसके लिए किसी समय सीमा का प्रावधान नहीं है।
राजनीतिक मायने क्या हैं?
श्रमिक राजनीति के जानकारों का मानना है कि चेक ऑफ सिस्टम में मजबूत पकड़ किसी भी यूनियन की वास्तविक ताकत का पैमाना होती है। जिस संगठन की सदस्यता अधिक होती है, उसकी प्रबंधन के साथ बातचीत में उतनी ही मजबूत भूमिका होती है। ऐसे में बैठकों और समितियों से किसी यूनियन को दूर रखना भविष्य के श्रमिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
कोयला मजदूर पंचायत ने मांग की है कि चेक ऑफ सिस्टम से जुड़ी हर बैठक और निर्णय प्रक्रिया में उसे समान भागीदारी दी जाए। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एसईसीएल प्रबंधन सभी यूनियनों को समान अवसर देगा या फिर श्रमिक राजनीति की यह जंग आने वाले दिनों में और तेज होगी।






