
कोरबा। Korba Wood Smuggling Case फिल्म पुष्पा में लाल चंदन की तस्करी का खेल पर्दे पर दिखा था, लेकिन कोरबा में इमारती लकड़ी के मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआत सिर्फ सात पेड़ों की लकड़ी के कथित अवैध परिवहन की शिकायत से हुई, लेकिन पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो करीब 20.169 घनमीटर बेशकीमती इमारती लकड़ी, लगभग 9 लाख रुपये की कीमत और परिवहन में इस्तेमाल की गई एक क्रेन बरामद हुई।

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि यदि शिकायत केवल सात पेड़ों की थी, तो इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी आखिर कहां से आई? क्या यह सिर्फ एक घटना थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? और सबसे महत्वपूर्ण, यह सब वन विभाग की निगरानी में कैसे होता रहा?

कोरबा पुलिस ने वन विभाग की रिपोर्ट पर थाना सिविल लाइन रामपुर में अपराध दर्ज कर विशेष टीम गठित की। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में हुई जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर लकड़ी का परिवहन कोरबा से रायपुर-अभनपुर क्षेत्र तक होने के तथ्य सामने आए। संयुक्त कार्रवाई में बड़ी मात्रा में लकड़ी और एक क्रेन जब्त की गई।
मामले में आरोपी सुनील कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। हालांकि जांच अभी जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।
इस कार्रवाई के बाद कई सवाल जवाब मांग रहे हैं। यदि इतनी बड़ी मात्रा में इमारती लकड़ी का परिवहन हुआ, तो क्या वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर्याप्त थी? क्या परिवहन और भंडारण के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई? क्या इस मामले में अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी सामने आएगी?
फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित तरीके से जारी है। जांच में जो भी व्यक्ति या नेटवर्क सामने आएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह कार्रवाई केवल एक आरोपी तक सीमित रहेगी या पूरे नेटवर्क से पर्दा उठेगा।






