प्रतीकात्मक तस्वीर
कोरबा।Korba Traffic Jam शहर की सड़कों पर लगने वाला हर जाम प्रशासन की नाकामी का परिणाम नहीं होता। कई बार इसके पीछे हम स्वयं जिम्मेदार होते हैं। सड़क के बीचोंबीच वाहन खड़ा कर देना, नो पार्किंग में पार्किंग करना, बाजारों में मनमाने ढंग से गाड़ियां छोड़ देना, एक-दूसरे से बात करने के लिए बीच सड़क पर वाहन रोक देना और नियमों की अनदेखी करना, यही छोटी-छोटी लापरवाहियां कुछ ही मिनटों में पूरे शहर की रफ्तार थाम देती हैं।
कोरबा में इन दिनों बाजार, चौक-चौराहों और प्रमुख मार्गों पर लगने वाला ट्रैफिक जाम हजारों लोगों की रोजमर्रा की परेशानी बन चुका है। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीज, नौकरीपेशा लोग, व्यापारी और एंबुलेंस तक इस अव्यवस्था का खामियाजा भुगतते हैं। कुछ लोगों की असावधानी का बोझ पूरा शहर उठाता है।
सवाल यह है कि क्या हर समस्या का समाधान केवल पुलिस या प्रशासन के पास है? यदि नागरिक स्वयं ट्रैफिक नियमों का पालन करें, निर्धारित पार्किंग का उपयोग करें, सड़क को अपना निजी पार्किंग स्थल न समझें और दूसरों की सुविधा का भी ध्यान रखें, तो जाम की बड़ी समस्या बिना किसी अतिरिक्त संसाधन के काफी हद तक खत्म हो सकती है।
सड़क केवल हमारी नहीं, हर नागरिक की है। जिस तरह हम अपने घर के बाहर अव्यवस्था पसंद नहीं करते, उसी तरह सार्वजनिक स्थानों पर भी अनुशासन हमारी जिम्मेदारी है। कुछ मिनट बचाने की जल्दबाजी कई लोगों के घंटों बर्बाद कर देती है। कई बार यही जाम किसी मरीज की जान पर भी भारी पड़ सकता है।
जरूरत केवल सख्त चालान की नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता की भी है। ट्रैफिक नियम कानून का डर नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी हैं। जब तक नागरिक अपनी भूमिका नहीं समझेंगे, तब तक हर नई सड़क, हर नया चौड़ीकरण और हर ट्रैफिक व्यवस्था कुछ समय बाद फिर उसी जाम में फंस जाएगी।
आइए एक संकल्प लें। सड़क पर वाहन वहीं खड़ा करें जहां अनुमति हो, नियमों का पालन करें, दूसरों की सुविधा का सम्मान करें और ऐसा नागरिक बनें जो समस्या नहीं, समाधान का हिस्सा बने। क्योंकि मानव निर्मित ट्रैफिक जाम से मुक्ति केवल प्रशासन नहीं, बल्कि जागरूक नागरिक ही दिला सकते हैं। समझदारी में ही सबकी भलाई है।






