कोरबा।RTE Reimbursement Scam Korba शिक्षा के अधिकार (RTE) योजना के तहत शासन की लाखों रुपये की राशि के कथित गबन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। शहर के तुलसीनगर स्थित गौरव युवा मंडल द्वारा संचालित कौशिल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पर आरटीई प्रतिपूर्ति राशि में गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं। जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने और वसूली के आदेश जारी होने के बावजूद अब तक राशि शासकीय कोष में जमा नहीं कराई गई है। इससे जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
फर्जी प्रविष्टियों के जरिए लाखों की निकासी का आरोप
मामले की जांच में सामने आया कि सत्र 2023-24 में विद्यालय द्वारा नर्सरी से 12वीं तक के विद्यार्थियों के नाम पर आरटीई दावा प्रतिपूर्ति प्रस्तुत की गई। जांच के दौरान पाया गया कि कई विद्यार्थियों की जानकारी संदिग्ध है और उनके नाम पर राशि आहरित की गई। आरोप है कि फर्जी प्रविष्टियों के माध्यम से लगभग 11 लाख 36 हजार 336 रुपये की राशि निकालकर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
रिकॉर्ड मिलान में खुली पोल
जांच रिपोर्ट के अनुसार विद्यालय ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक कुल 129 विद्यार्थियों की सूची प्रस्तुत की थी, जिनमें 43 विद्यार्थियों को आरटीई के तहत प्रवेशित बताया गया। जबकि आरटीई पोर्टल में उसी सत्र के लिए मात्र 56 विद्यार्थियों की स्वीकृति दर्ज थी।
रिकॉर्ड के मिलान के दौरान 13 विद्यार्थियों की जानकारी सूची में ही नहीं मिली, जिससे पूरे दावे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए। जांच अधिकारियों ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए शासन को हुई क्षति का उल्लेख अपनी रिपोर्ट में किया।
वसूली का आदेश, लेकिन रकम अब भी अटकी
मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित प्राचार्य के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई और 3 लाख 27 हजार 208 रुपये की वसूली योग्य राशि चालान के माध्यम से शासकीय कोष में जमा कराने के आदेश जारी किए गए। लेकिन आदेश जारी होने के एक माह बाद भी राशि जमा नहीं हो सकी है।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि आखिर रिकवरी आदेश के बाद भी कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ रही? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण शासन की राशि फंसी हुई है, या फिर किसी स्तर पर संरक्षण का खेल चल रहा है?
DEO कार्यालय की भूमिका पर उठे सवाल
पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की निष्क्रियता चर्चा का विषय बन गई है। जब जांच पूरी हो चुकी है और वसूली का आदेश भी जारी हो चुका है, तब राशि जमा न होने पर विभाग की जवाबदेही तय होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
शिक्षा विभाग के गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आरटीई जैसी महत्वपूर्ण योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।






