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CG DMF Scam: पूर्व आईएएस टुटेजा की जमानत याचिका खारिज, गवाहों को प्रभावित करने की आशंका जताई हाईकोर्ट ने

बिलासपुर। कोरबा जिले के डीएमएफ फंड में कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े चर्चित मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपों की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता दर्शाते हैं।

न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपी एक वरिष्ठ पद पर रह चुके हैं, ऐसे में उनके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध सामान्यतः सुनियोजित और पूर्वनियोजित होते हैं, जिनका उद्देश्य निजी लाभ अर्जित करना होता है। ऐसे अपराध न केवल जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और हितों को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

 

इस मामले की केस डायरी का उल्लेख करते हुए न्यायालय ने कहा कि सतपाल सिंह छाबड़ा को विभिन्न फर्मों से लगभग 16 करोड़ रुपए अवैध कमीशन के रूप में प्राप्त हुए थे। इन्हीं रकमों से आरोपी को भी भुगतान किया गया, जिससे प्रथम दृष्टया उनकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी कंपनियों के माध्यम से सार्वजनिक धन के गबन को बढ़ावा दिया, जिससे जनहित को गंभीर क्षति पहुंची है।

बता दें कि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 23 फरवरी 2026 को उद्योग विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त सचिव रहे अनिल टुटेजा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर उन्हें जेल भेजा गया।

जमानत याचिका में टुटेजा की ओर से दलील दी गई थी कि मामले के कुछ सह-आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है और ट्रायल में देरी हो रही है। हालांकि, सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना और याचिका खारिज कर दी।

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