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Korba: होली मिलन के बहाने सियासी जमीन मजबूत कर रहे नेता.. पूर्व मंत्री,मंत्री पूर्व महापौर के बाद महापौर की भी हुई एंट्री…

कोरबा। Korba Holi Milan Political Show of Strength छत्तीसगढ़ में सरकार के ढाई साल पूरे होने के साथ ही चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है। जिले में राजनीतिक हलचल अब खुलकर दिखाई देने लगी है। इस बार होली मिलन समारोह सिर्फ रंग और गुलाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सियासी ताकत दिखाने के मंच के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेता अपने-अपने समर्थकों को जुटाने में पूरी ताकत लगा रहे हैं।

4 मार्च, बुधवार को कोरबा शहर में अलग-अलग स्थानों पर कई बड़े होली मिलन कार्यक्रम आयोजित होने जा रहे हैं। खास बात यह है कि एक ही दिन कांग्रेस और भाजपा के तीन-तीन दिग्गज नेता अपने-अपने कार्यक्रम रख रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे सीधे तौर पर शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।
दर्री रोड स्थित स्वर्ण सिटी में सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल द्वारा भव्य होली मिलन समारोह आयोजित किया जाएगा। हाल ही में उनके जन्मदिन पर उमड़ी भीड़ ने पहले ही सियासी संदेश दे दिया है। ऐसे में उनके होली मिलन कार्यक्रम पर भी सबकी नजरें टिकी हैं।
भाजपा खेमे में भी कम सक्रियता नहीं दिख रही। प्रदेश के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने अपने चारपारा कोहड़िया स्थित निवास पर सुबह 9 से 12 बजे तक होली मिलन का आयोजन रखा है। इसके अलावा कोरबा नगर निगम के पूर्व महापौर योगेश लांबा रानी रोड धनवार पारा स्थित अपने निवास पर समर्थकों से मुलाकात करेंगे। भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने चित्रा टाकीज प्रांगण में होली मिलन समारोह का आमंत्रण जारी किया है। भाजपा के वर्तमान महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत होली मिलन समारोह के राजनीति में एंट्री करते हुए राम राताखर निवास में मिलन समारोह रखा है।
शहर में इन कार्यक्रमों को लेकर खासा उत्साह है। आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय यही है कि किस नेता के यहां कितनी भीड़ जुटती है। समर्थकों की संख्या को लेकर अनौपचारिक तुलना शुरू हो चुकी है। लोग इसे आगामी चुनाव से पहले की राजनीतिक नब्ज टटोलने का मौका मान रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे आयोजनों के जरिए नेता न सिर्फ कार्यकर्ताओं को सक्रिय करते हैं, बल्कि अपने प्रभाव क्षेत्र का आकलन भी करते हैं। होली जैसे सामाजिक पर्व का मंच, आपसी मेल-मिलाप के साथ-साथ संगठनात्मक मजबूती का अवसर भी बन जाता है।
अब 4 मार्च को होने वाले इन आयोजनों पर सभी की निगाहें टिकी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि रंगों के इस त्योहार में किसके समर्थन का रंग सबसे गहरा नजर आता है और कौन किस पर भारी पड़ता है।

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