Dwarka Road Accident : FIR में 19 साल दर्ज, दस्तावेज़ जांच में आरोपी निकला नाबालिग; पिता पर भी कानूनी शिकंजा
नई दिल्ली,17 फरवरी। Dwarka Road Accident : दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के द्वारका इलाके में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में 23 वर्षीय साहिल दिनेशरा की मौत के बाद जांच ने नया मोड़ ले लिया है। प्रारंभिक एफआईआर में आरोपी की उम्र 19 वर्ष दर्ज की गई थी, लेकिन स्कूल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच में वह नाबालिग निकला। उम्र की पुष्टि होते ही पुलिस ने आरोपी को पकड़कर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के समक्ष पेश किया और केस को बाल न्याय प्रणाली के तहत आगे बढ़ाया गया।
उम्र दर्ज करने में चूक या भ्रामक जानकारी?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, हादसे के तुरंत बाद उपलब्ध प्राथमिक जानकारी के आधार पर उम्र दर्ज की गई थी। बाद में जब जन्मतिथि संबंधी प्रमाण—स्कूल सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज—खंगाले गए, तो वास्तविक उम्र सामने आई। नाबालिग होने की पुष्टि होते ही प्रक्रिया बदलनी पड़ी। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे मामलों में उम्र निर्धारण बेहद अहम होता है क्योंकि इससे गिरफ्तारी, पूछताछ और ट्रायल की पूरी कानूनी रूपरेखा बदल जाती है।
जुवेनाइल जस्टिस कानून के तहत आगे बढ़ेगा केस
आरोपी के नाबालिग पाए जाने के बाद मामला अब किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार चलेगा। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड यह तय करेगा कि आरोपी के साथ सुधारात्मक, परामर्शात्मक या अन्य कानूनी प्रक्रिया कैसे अपनाई जाए। गंभीर अपराधों में भी, यदि आरोपी की उम्र घटना के समय 18 वर्ष से कम है, तो सुनवाई की प्रक्रिया वयस्कों से अलग होती है।
पिता को नोटिस, 24 घंटे हिरासत में पूछताछ
मामले में पुलिस ने आरोपी के पिता को भी नोटिस जारी किया। नोटिस के बाद वे जांच में शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें लगभग 24 घंटे तक हिरासत में रखकर पूछताछ की गई और बयान दर्ज किए गए। फिलहाल उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां यह देख रही हैं कि वाहन किसकी अनुमति से चलाया जा रहा था और निगरानी की क्या व्यवस्था थी।
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199A के तहत कार्रवाई
पुलिस ने संकेत दिया है कि आरोपी के पिता के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199A के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह प्रावधान तब लागू होता है जब कोई नाबालिग अभिभावक/वाहन मालिक की अनुमति से वाहन चलाते हुए दुर्घटना में शामिल पाया जाता है। ऐसे मामलों में अभिभावक की जिम्मेदारी तय की जाती है और चार्जशीट में संबंधित धारा जोड़ी जाती है। अदालत सजा या जुर्माने पर अंतिम निर्णय लेती है।
हादसे की परिस्थितियां और आगे की जांच
जांचकर्ता सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और वाहन की तकनीकी जांच (मैकेनिकल इंस्पेक्शन) की रिपोर्ट का विश्लेषण कर रहे हैं। यह भी देखा जा रहा है कि वाहन की रफ्तार, सड़क की स्थिति और ट्रैफिक नियमों के पालन में कोई चूक तो नहीं हुई। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या वाहन का उपयोग नियमित रूप से नाबालिग द्वारा किया जाता था और क्या परिवार को इसकी जानकारी थी।
जिम्मेदारी और कानूनी नजीर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों में अभिभावकों की जवाबदेही तय करना सड़क सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने समय-समय पर सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ऐसे मामलों में पुलिस की जांच और अभियोजन की मजबूती भविष्य की कानूनी नजीर तय कर सकती है।
पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और सड़क सुरक्षा नियमों के कड़ाई से पालन के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी समीक्षा की जा रही है।



