
कोरबा। 12 फरवरी की 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में छत्तीसगढ़ के बिजली कर्मियों ने गुरुवार को सांकेतिक हड़ताल कर जोरदार विरोध दर्ज कराया। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन के आह्वान पर प्रदेशभर में उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण इकाइयों के कर्मचारियों ने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया।

यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष अनिल द्विवेदी और महासचिव अजय बाबर ने कहा कि प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक 2025 बिजली क्षेत्र के निजीकरण का रास्ता खोलता है। उनका आरोप है कि यदि यह विधेयक लागू होता है तो बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनियों के हाथों में चली जाएगी, जिसका असर सीधे तौर पर उपभोक्ताओं, किसानों और कर्मचारियों पर पड़ेगा।
यूनियन नेताओं ने आशंका जताई कि निजीकरण से बिजली दरों में बढ़ोतरी, सेवा सुरक्षा में कमी और कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि बिजली जैसी सार्वजनिक उपयोगिता सेवा को निजी हाथों में सौंपना जनहित के खिलाफ है।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी एकजुटता दिखाई। यूनियन ने स्पष्ट किया कि यह केवल सांकेतिक विरोध है। यदि केंद्र सरकार ने कर्मचारी हितों की अनदेखी की, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
महासचिव अजय बाबर ने चेतावनी देते हुए कहा कि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो भविष्य में उग्र आंदोलन की जिम्मेदारी सरकार की होगी। यूनियन ने केंद्र सरकार से बिजली संशोधन विधेयक वापस लेने और कर्मचारियों व उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्रदेश में हुए इस प्रदर्शन से साफ है कि बिजली क्षेत्र में प्रस्तावित बदलावों को लेकर कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है, जो आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।



