Heavy Blasting : गेवरा खदान में 5 घंटे तक कोल उत्पादन ठप…! भू-विस्थापितों का जोरदार प्रदर्शन…VIDEO

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Heavy Blasting

कोरबा, 03 फरवरी। Heavy Blasting : छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के नेतृत्व में एसईसीएल की गेवरा खदान से प्रभावित भू-विस्थापित किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने खदान में मिट्टी और कोयला खनन कार्य के साथ-साथ साइलो को भी लगभग 5 घंटे तक बंद करा दिया, जिससे रैक लोडिंग का कार्य प्रभावित हुआ।

प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस और सीआईएसएफ के जवान तैनात रहे।

100% रोजगार नहीं देने का आरोप

हड़ताल को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि खदान विस्तार के लिए ग्रामीणों की पूरी जमीन ली जा रही है, लेकिन रोजगार देते समय प्रभावित परिवारों को 100 प्रतिशत रोजगार नहीं दिया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 30 प्रतिशत रोजगार बाहर के लोगों को दिया जा रहा है, जिससे विस्थापितों के हक का हनन हो रहा है।

उन्होंने कहा कि अपनी जमीन और गांव से बेदखल किए गए विस्थापित परिवारों की जीवन-स्तर सुधरने के बजाय और बदतर हो गया है। हजारों छोटे किसान खेती से वंचित हो चुके हैं और वैकल्पिक रोजगार में भी “प्रतिशत का खेल” किया जा रहा है। यदि दो दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

सेफ्टी जोन व आउटसोर्सिंग पर सवाल

किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू ने आउटसोर्सिंग कंपनियों पर भू-विस्थापितों को प्राथमिकता नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिना सेफ्टी जोन बनाए ही खदान विस्तार किया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। पहले सेफ्टी जोन बनाया जाए, उसके बाद ही खदान विस्तार किया जाना चाहिए।

हेवी ब्लास्टिंग से दहशत

भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के नेता दामोदर श्याम ने कहा कि खदान विस्तार के लिए की जा रही हेवी ब्लास्टिंग से घरों में दरारें पड़ रही हैं और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। साथ ही उड़ने वाली धूल-डस्ट से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और घरेलू सामान भी खराब हो रहे हैं, लेकिन प्रबंधन इस ओर गंभीर नहीं है।

प्रमुख मांगें

  1. एसईसीएल में आउटसोर्सिंग से होने वाले सभी कार्यों में भू-विस्थापित परिवारों के बेरोजगारों को 100% रोजगार दिया जाए।
  2. हेवी ब्लास्टिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए।
  3. गेवरा खदान विस्तार से पहले सेफ्टी जोन के नियमों का पालन किया जाए।
  4. खदान व परिवहन से उड़ने वाली धूल-डस्ट से प्रभावित गांवों को क्षतिपूर्ति दी जाए।

प्रबंधन का आश्वासन

लगभग 5 घंटे तक खदान बंद रहने के बाद एसईसीएल गेवरा प्रबंधन ने दो दिनों के भीतर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया। हालांकि आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में सकारात्मक समाधान नहीं हुआ, तो पुनः खदान बंद कर आंदोलन किया जाएगा।

इस आंदोलन में प्रमुख रूप से दीपक साहू, दामोदर श्याम, सुक्रिता, राजकुमारी, अमृत बाई, राज कुंवर, जगत सिंह कंवर, सुमेन्द्र सिंह कंवर, मिथलेश, रमेश कठोतिया, गुलाब दास, पवन पाटले, यशवर्धन, राजेंद्र राठौर, रमेश दास, तुलेष बैरागी, बिमल दास, हेतराम, रामायण कंवर, संजय यादव सहित बड़ी संख्या में भू-विस्थापित ग्रामीण शामिल रहे।

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