Korba Land Dispute : जल-जंगल-जमीन को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज…! कलेक्टर जनदर्शन में ग्रामीण पहुंचे…आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी

News Power Zone
3 Min Read
Korba Land Dispute

कोरबा, 30 दिसंबर। Korba Land Dispute : छत्तीसगढ़ प्रदेश में इन दिनों जल, जंगल और जमीन को लेकर किसानों और आम जनता का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन-प्रशासन उनकी गुहारों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है, जिसके चलते प्रदेश के कई इलाकों में हिंसक झड़प की स्थिति बन रही है।

सरगुजा और रायगढ़ में पहले भी हो चुकी हैं हिंसक घटनाएं

हाल ही में सरगुजा और रायगढ़ जिलों में ग्रामीणों के विरोध के बावजूद प्रस्तावित कंपनियों द्वारा पेड़ कटाई और कथित अवैध कब्जे को लेकर हुई झड़पों में कई अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके बावजूद शासन और प्रशासन की ओर से सख्त कदम न उठाए जाने के आरोप लग रहे हैं।

दोनद्रों ग्राम पंचायत ने कलेक्टर से की शिकायत

इसी कड़ी में जनपद पंचायत कोरबा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत दोनद्रों के सरपंच सहित ग्रामीण सोमवार को कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे। ग्रामीणों ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि वेदांता समूह की बालको कंपनी द्वारा ग्राम पंचायत की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जा रहा है।

बालको अधिकारियों पर दादागिरी और गाली-गलौच का आरोप

शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने बालको प्रबंधन के अधिकारी देव आशीष दास (CSR हेड), सुमन सिंह (मेंटेनेंस हेड, बालको टाउनशिप), अभय राज सिंह, राजेश सिंह और रंजीत सिंह पर दादागिरी करने और अभद्र भाषा में गाली-गलौच करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने अवैध कब्जे को तत्काल हटाने और निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की है।

आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी

ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेकर जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे जनप्रतिनिधियों के साथ उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

बालको का पक्ष नहीं आया सामने

इस पूरे मामले में बालको का पक्ष जानने के लिए कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी विजय बाजपेई से दूरभाष और व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

प्रशासन की भूमिका पर टिकी नजर

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का निराकरण किस तरह करता है और क्या ग्रामीणों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

Share This Article