
Korba Breaking कोरबा। जिले की पुलिस व्यवस्था में एक बार फिर प्रशासनिक निर्णय चर्चा का विषय बन गया है। थाना करतला के तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक कृष्ण कुमार वर्मा को जहां 19 दिसंबर 2025 को सस्पेंड किया गया था, वहीं ठीक 10 दिन बाद 29 दिसंबर को उन्हें बहाल भी कर दिया गया। इस तेजी से बदले फैसले ने पुलिस महकमे से लेकर आम लोगों तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल 19 दिसंबर को सायबर सेल, थाना उरगा और चौकी रजगामार की संयुक्त टीम ने थाना करतला क्षेत्र के भैंसवार जंगल में जुए के बड़े अड्डे पर छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान 20 जुआरियों को रंगे हाथ पकड़ा गया। मौके से करीब 2.5 लाख रुपये नकद, 23 मोटरसाइकिल, एक कार और 35 मोबाइल फोन जब्त किए गए थे। मामला सामने आने के बाद यह सवाल उठा कि इतने बड़े पैमाने पर जुआ आखिर थाना क्षेत्र में कैसे फल-फूल रहा था।
इसी को आधार बनाकर पुलिस अधीक्षक ने कर्तव्य में लापरवाही, शिथिलता और संदिग्ध कार्यशैली के आरोप में निरीक्षक कृष्ण कुमार वर्मा को 19 दिसंबर की दोपहर से निलंबित कर रक्षित केंद्र कोरबा अटैच कर दिया था। उस समय कार्रवाई को सख्त संदेश के तौर पर देखा गया।
लेकिन 29 दिसंबर 2025 को जारी नए आदेश में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने निरीक्षक कृष्ण कुमार वर्मा को प्रशासनिक आधार पर निलंबन से मुक्त करते हुए बहाल कर दिया। आदेश में यह भी कहा गया है कि निलंबन अवधि का अंतिम निर्णय लंबित विभागीय जांच के निष्कर्ष के बाद लिया जाएगा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब आरोप गंभीर थे और जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है, तो इतनी जल्दी बहाली क्यों की गई। क्या प्रारंभिक कार्रवाई जल्दबाजी में की गई थी या फिर बहाली के पीछे कोई और वजह है। पुलिस विभाग के अंदरखाने भी इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हैं और निगाहें अब विभागीय जांच के नतीजों पर टिकी हुई




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