अमारी भाजी से बनेगा शरबत, जैम-जेली और चटनी की बढ़ी डिमांड; आयरन और विटामिन से भरपूर सुपरफूड बन रही छत्तीसगढ़ की फसल

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बिलासपुर। कभी सिर्फ खट्टे स्वाद वाली सब्जी मानी जाने वाली अमारी भाजी अब व्यावसायिक सफलता की कहानी बन गई है। छत्तीसगढ़ की यह देसी भाजी आज गुजरात, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक धूम मचा रही है। इसकी मांग इतनी बढ़ गई है कि किसानों को 100 से 150 रुपये किलो तक का दाम मिल रहा है।

 

विशेष बात यह है कि अमारी का हर हिस्सा उपयोगी है। पत्तियां सब्जी बनाने में काम आती हैं, फूलों से चटनी, जैम और जेली तैयार की जा रही है, और अब शरबत निर्माण कंपनियां भी इसे बड़े पैमाने पर खरीदने में रुचि दिखा रही हैं। बीज से तेल निकाला जा सकता है और तने के रेशों से रस्सी बनाई जाती है। कुछ आदिवासी इलाकों में इससे आटा भी तैयार हो रहा है।

हर हिस्सा उपयोगी

अमारी के फूल और पत्तियां औषधीय गुणों से भरपूर हैं। अनुसंधान में इसमें आयरन, फाइबर, फोलिक एसिड, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और विटामिन सी पाए गए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमारी का सेवन मानसून के दिनों में भी सुरक्षित है क्योंकि इसकी उम्र लगभग 90 दिन की होती है।

मेडिसिनल प्रॉपर्टीज ने बढ़ाई कीमत

बीटीसी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर के वैज्ञानिक अजीत विलियम्स बताते हैं, “अमारी भाजी में सात तरह की मेडिसिनल प्रॉपर्टीज हैं। इन्हीं खूबियों की वजह से जैम, जेली, चटनी, आइसक्रीम और शरबत बनाने वाली इकाइयां अब अमारी की खरीदी को प्राथमिकता दे रही हैं।”

तेजी से बढ़ती मांग और उच्च बाजार मूल्य के कारण अब अमारी की खेती न सिर्फ किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान भी मजबूत कर रही है।

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