
जटराज। गांव की पहचान सिर्फ खेत-खलिहान और घर-आंगन से नहीं होती, बल्कि वहां के लोग किस तरह अपने गांव को संवारते हैं, यह भी मायने रखता है। इसी सोच को आत्मसात करते हुए जटराज गांव के लोगों ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बुधवार को आयोजित ग्रामीण बैठक में सभी ने मिलकर संकल्प लिया कि अब गांव की सड़कों पर आवारा गाय-बैल नहीं भटकेंगे। गाय और बैल को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए गांव के ग्रामीण काम करेंगे।
बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे थे। चर्चा के दौरान सबकी चिंता एक ही थी—सड़क पर घूमते मवेशियों से होने वाली परेशानियां और दुर्घटनाएं। आखिरकार, सबने एकमत होकर तय किया कि हर परिवार जिम्मेदारी निभाएगा। पारी प्रणाली बनाई जाएगी, जिसके तहत बारी-बारी से ग्रामीण गाय-बैल की देखभाल करेंगे ताकि वे खुले में सड़कों पर न रहें।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक निर्णय नहीं बल्कि गांव को अनुशासित और सुरक्षित बनाने का सपना है। बुजुर्गों ने इसे गांव की परंपरा और संस्कारों से जोड़ा, वहीं युवाओं ने इसे आधुनिक सोच और जिम्मेदारी की मिसाल बताया। सभी ने माना कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
गांव के लोगों ने भरोसा जताया कि जब सब मिलकर आगे आएंगे, तो जटराज की सूरत बदलेगी। सड़कों पर अब न तो अव्यवस्था होगी और न ही दुर्घटनाओं का खतरा। यह सामूहिक संकल्प गांव को नई पहचान दिलाएगा।



