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घर की ‘तीसरी आंख’ बन सकती है सबसे बड़ा खतरा! CCTV हैकिंग से आपकी निजी ज़िंदगी खतरे में

कोरबा। शहर के पाश इलाकों और रिहायशी क्षेत्रों में सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे लगवाना अब एक जरूरत बन गया है। लोग घर की सुरक्षा और चोरी की वारदातों से बचने के लिए हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं।लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सुरक्षा के लिए लगा यह तीसरी आंख वाला पहरेदार आपकी प्राइवेसी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है? हाल के दिनों में साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि सीसीटीवी कैमरों की सेटिंग में लापरवाही बरती गई, तो आपके घर के भीतर की हलचल कोई भी अंजान व्यक्ति दुनिया के किसी भी कोने से लाइव देख सकता है।

रिमोट व्यू आप्शन : सुविधा या संकट

आजकल अधिकांश लोग कैमरों को अपने मोबाइल से कनेक्ट करवाते हैं ताकि आफिस या शहर से बाहर होने पर भी घर की निगरानी कर सकें। इसे रिमोट व्यू आप्शन कहा जाता है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब हम यह आप्शन आन करते हैं, तो हमारे कैमरों का डेटा क्लाउड या इंटरनेट सर्वर पर चला जाता है। यदि आपके सिस्टम का पासवर्ड डिफाल्ट यानि 12345 या एडमिन) है या बहुत कमजोर है, तो हैकर्स इसे आसानी से क्रैक कर लेते हैं।

प्राइवेसी लीक होने का खतरा

एक बार कैमरा हैक होने के बाद, आपकी निजी बातचीत, बेडरूम या लिविंग रूम की गतिविधियों पर किसी और का नियंत्रण हो जाता है। ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोग कैमरों के माध्यम से ब्लैकमेलिंग का शिकार होने की कगार पर पहुंच गए, क्योंकि उन्होंने इंस्टालेशन के समय पासवर्ड नहीं बदला था।

इन पांच बातों का रखें विशेष ध्यान

पासवर्ड तुरंत बदलें : कैमरा इंस्टाल करने वाला टेक्नीशियन अक्सर एक कामन पासवर्ड सेट कर देता है। काम पूरा होते ही सबसे पहले उसे बदलें और एक स्ट्रांग पासवर्ड (अक्षर, अंक और स्पेशल कैरेक्टर युक्त) रखें।

टू-फैक्टर आथेंटिकेशन : यदि आपके कैमरे का ऐप सपोर्ट करता है, तो टूएफए जरूर इनेबल करें। इससे पासवर्ड पता होने पर भी बिना ओटीपी के कोई लागिन नहीं कर पाएगा।

साफ्टवेयर अपडेट : कैमरों के फर्मवेयर को समय-समय पर अपडेट करते रहें। कंपनियां अक्सर सुरक्षा कमियों को दूर करने के लिए अपडेट जारी करती हैं।

कैमरे की पोजिशन : बेडरूम या ऐसे स्थान जहां आपकी अत्यधिक निजता हो, वहां कैमरे लगाने से बचें। मुख्य द्वार, लाबी और बाहरी रास्तों पर फोकस रखना अधिक सुरक्षित है।

लोकल स्टोरेज का विकल्प : यदि बहुत जरूरी न हो, तो क्लाउड स्टोरेज की जगह डीवीआर में ही रिकार्डिंग रखें और इंटरनेट एक्सेस तभी आन करें जब आप घर से बाहर हों।

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