Tara Coal Block की नीलामी पर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान, कांग्रेस ने पूछा- क्या खनन की अनुमति नहीं देने की गारंटी देगी साय सरकार?

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रायपुर, 13 सितंबर। Tara Coal Block : छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा के उस तर्क पर सवाल उठाया है, जिसमें कहा जा रहा है कि फिलहाल केवल खदान की नीलामी हुई है और पर्यावरण स्वीकृति समेत अन्य अनुमतियां अभी बाकी हैं। कांग्रेस ने भाजपा सरकार से सीधा सवाल किया है कि क्या वह गारंटी देगी कि तारा कोल ब्लॉक के लिए पर्यावरण स्वीकृति की सहमति नहीं दी जाएगी और वहां कोयला उत्खनन नहीं होने दिया जाएगा?

तारा कोल ब्लॉक पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा के नीलामी के बाद बाकी मंजूरियां होने के तर्क को बचकाना बताया। कांग्रेस का कहना है कि यदि राज्य सरकार ने खुद तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए केंद्र को अनुशंसा की है, तो आगे की अनुमतियों को रोकने का भरोसा कैसे किया जा सकता है। कांग्रेस ने इसी आधार पर साय सरकार से स्पष्ट गारंटी की मांग की है।

नीलामी के लिए राज्य सरकार के पत्र पर उठे सवाल

कांग्रेस के अनुसार, वर्तमान साय सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय को पत्र लिखकर अनुशंसा की थी। वहीं कांग्रेस का दावा है कि पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने 23 जून 2023 को तारा समेत 9 कोल ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से बाहर रखने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। कांग्रेस ने दोनों सरकारों के रुख में अंतर को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है।

5 हजार एकड़ क्षेत्र और 10 लाख पेड़ों के कटने का दावा

कांग्रेस ने तारा कोल ब्लॉक के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। पार्टी का दावा है कि यह कोल ब्लॉक करीब 5,000 एकड़ क्षेत्र में फैला है, जिसमें 4,000 एकड़ से अधिक घना जंगल है। कांग्रेस के अनुसार, खनन परियोजना के चलते 10 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई की आशंका है। पार्टी ने इसे हसदेव अरण्य के पर्यावरण और जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा बताया है।

लेमरू रिजर्व और वन्यजीवों पर संकट का आरोप

कांग्रेस ने कहा है कि लेमरू एलिफेंट रिजर्व के आसपास खनन होने से हाथियों की आवाजाही और उनके प्राकृतिक कॉरिडोर पर गंभीर असर पड़ सकता है। पार्टी का दावा है कि इससे हाथियों के साथ-साथ क्षेत्र में मौजूद अन्य वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी खतरा बढ़ सकता है। कांग्रेस ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में नए खनन को लेकर पहले लिए गए फैसलों की भी याद दिलाई है।

विधानसभा प्रस्ताव से सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे तक का हवाला

कांग्रेस ने बताया कि 26 जुलाई 2022 को तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर हसदेव अरण्य क्षेत्र में नए कोल ब्लॉक के आवंटन या नीलामी पर रोक की मांग की थी। इसके बाद 16 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर इस क्षेत्र में किसी नई खदान के विकास की आवश्यकता नहीं होने की बात कही गई थी। कांग्रेस के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा समेत 40 कोल ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से डीनोटिफाई किया था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इन ब्लॉकों को दोबारा नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार के फैसले जनहित के बजाय उद्योगपतियों के हित में जा रहे हैं। पार्टी ने एक बार फिर भाजपा सरकार से तारा कोल ब्लॉक के लिए पर्यावरण स्वीकृति नहीं देने और कोयला उत्खनन रोकने की गारंटी देने की मांग की है।

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