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कलेक्टर ने बाबू को डिमोट कर बना दिया चपरासी, ये है मामला

एमपी।मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में कलेक्टर भव्या मित्तल ने एक ऐसी कार्रवाई की है जिसकी चर्चा पूरे जिले में हो रही है। मित्तल ने एक भ्रष्ट बाबू को डिमोट कर चपरासी बना दिया है। बाबू को रिश्वत मांगने की सजा मिली है। उसने एक महिला से आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर भर्ती कराने के एवज में घूस मांगी थी। शिकायत को कलेक्टर ने गंभीरता से लिया और बाबू के खिलाफ जांच कराई। जांच में बाबू के दोषी पाए जाने के बाद उसे भ्रृत्य के पद पर अनवत किया गया है।

बाबू ने मांगी थी 10 हजार रूपए रिश्वत

महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत परियोजना कार्यालय खकनाक के सहायक ग्रेड-3 क्लर्क सुभाष काकड़े के खिलाफ ये कार्रवाई हुई है। क्लर्क सुभाष काकड़े ने आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर भर्ती के लिए 10 हजार रूपए की रिश्वत की मांग की थी जिसकी शिकायत फरियादी ने कलेक्टर से जनसुनवाई में की थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जुलाई 2024 में सुभाष काकडे को निलंबित किया गया था। कलेक्टर के आदेशानुसार मामले की विभागीय जांच संस्थित करने के संबंध में आरोप पत्र, आधार पत्र, जारी कर विभागीय जांच अधिकारी अपर कलेक्टर और परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास को नियुक्त कर जांच प्रतिवेदन मांगा गया था।

 

क्लर्क से डिमोट कर बनाया चपरासी

विभागीय जांच के दौरान निलंबित क्लर्क सुभाष काकड़े को पर्याप्त अवसर दिए गए साथ ही सुनवाई भी की गई लेकिन सुभाष काकड़े संतोषप्रद स्पष्टीकरण नहीं दे पाए। जिसके कारण विभागीय जांच अधिकारी के सामने जांच में दोष सिद्ध हुआ कि सुभाष काकडे का यह कृत्य अपने पद का दुरुपयोग कर म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 13,14 का स्पष्ट उल्लंघन होकर वित्तीय लाभ लेने की श्रेणी में आता हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी बाबू पर कार्रवाई की गई। जारी आदेश के अनुसार सुभाष काकडे को कार्यालय परियोजना अधिकारी नेपानगर के रिक्त परियोजना के पद पर किया जाता है।

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