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The tone is telling that: खाकी की 7 राते और 7 बातें,अफसरो के पत्नियों की ब्रांडिंग – फंडिंग..राजनीति की रामायण,नेताजी..का कल्पवास!

🔶 खाकी की 7 राते और 7 बातें.. !!

 

 

 

कहते है 7 बातें हमेशा गुप्‍त रखना चाहिए , सो पुलिस कप्तान ने भी अपनी एक्सपर्ट टीम के साथ लगातार 7 रातें जागकर जनमानस की 7 बातों को नजरअंदाज कर सराफा कारोबारी पर हुए प्रहार की गुत्थी सुलझाने में लगे रहे। पुलिस ने हत्या के आरोपियों को पकड़ने चल रही जांच के बीच शांत रहकर कप्तान को “तीर भी चलाने हैं और परिंदे भी बचाने हैं”, सो समय तो लगेगा का संदेश दिया। निर्मम अंधे कत्ल की गुत्थियां को सुलझाने में भले ही समय लगा लेकिन निर्दयी हत्यारे की आंखों में पुलिस पहले ही झांक चुकी थी ।

हत्या को लभगभ 7  दिन बीत चुकने पर पुलिस की कार्यशैली को लेकर 7 तरह की बातें भी जनमानस के बीच घूमती रही ! इन सबके बीच कप्तान की चुप्पी और एक्सपर्ट टीम की मेहनत कई संदेश देते रहे । कहते है ” मन का हो तो अच्छा है और जब मन का न हो तो और अच्छा है ” ठीक इस शब्द पर फोकस करते हुए पुलिस विभाग की टीम बिना थके बिना रुके रहस्यमयी हत्या को सुलझाने सफल हुई ।

विभागीय पंडितों की माने तो ऐसे हत्या के मामले में बहुत ही सूक्ष्मता से गहरे तक जांच करनी होती है क्योंकि “तीर भी चलाने हैं और परिंदे को भी बचाने हैं” जिससे सही आरोपियों की पहचान की जा सके। शहर के बीच हुए  इस चर्चित हत्याकांड पर जिलेवासियों की नजर टिकी रही और पुलिस की नजर आरोपियों पर ! आखिरकार पुलिस टीम को ब्लाइंड मर्डर को सुलझाने में सफलता मिली और विश्वास की हत्या करने वाले विश्वासघाती हत्यारों को गिरफ्तार भी…! ! कप्तान के काम करने का तरीका देखकर जनमानस में चाय पर चर्चा है हिम्मत उनके पास होती है जिसके दिल में सच्चाई हो ..!

 

🔶अफसरो के पत्नियों की ब्रांडिंग – फंडिंग, देने से ज्यादा लेने की होड़…

 

 

 

 

कोयलांचल के बड़े अफसरो के पत्नियों की ब्रैंडिंग पर श्रमवीरों में चर्चा छिड़ गई है। उनके समय -समय पर होने वाले फोटो शूट को लेकर कोयला कामगारों में खुसफुसाहट है.. “क्या बताये साहब ..यंहा तो देने से ज्यादा फ़ोटो लेने की होड़  है।”

कहावत है “भीख लेके भीख दो, और तीन लोक को जीत लो…” की पंक्ति औद्योगिक घरानों में चरितार्थ हो रही है। हम बात कर रहे है औद्योगिक संस्थानों में जनसेवा के नाम पर की जाने वाली पार्टी और पिकनिक की । महिला समिति और महिला मंडल के सरोकार के नाम से चलने वाले कार्यक्रम में अफसरो की पत्नियां पहले क्रम पर रहती है। होंठों पर लाली,  कानो में स्टाइलिश बाली के साथ जनसमुदाय का सहयोगी बनने का स्वांग रचाकर फ़ोटो खिंचाने में आगे रहती है। गर्मी में छाता तो सर्दी में स्वेटर और सोशल मीडिया में दान वीर कर्ण बनने का मैटर ही इनका मूलमंत्र है।

कहा तो यह भी जा रहा है कि महिला समिति और मंडलों के समाज सेवा के काम मे आयोजक अपने हिस्से का मेवा निकाल लेते है, क्योंकि बड़े अफसरो के पत्नियों के लिए कार्यक्रम को हाईटेक करने की चाह और साहब को खुश करने की राह को आसान करने लिए दस का सामान बीस में खरीद कर सेवा से मेवा निकाला जाता है। कहा तो यह भी जा रहा है कि एसईसीएल अपने उच्च अफसरों के साथ ही उनकी पत्नियों को खुश करने के लिए साल में करोड़ो रुपये मात्र फूल माला पर ही खर्च कर देता है और श्रमविरो के सम्मान पर मुनाफे कम होने का रोना रोकर..कम बोनस में काम चलाने का समझौता करता है। समाज सेवा के नाम पर चल रहे फोटो शूट का यही तो दूसरा रूप है..”भीख लेके भीख दो और तीन लोक को जीत लो …।”

 

 

🔶नेताजी..का कल्पवास!

 

 

पिछले सप्ताह में प्रदेश में महापौर पद के लिए आरक्षण प्रक्रिया पूरी हुई..लाटरी में मेयर का पद महिला सामान्य के लिए आरक्षित हो गया..। इस बीच खबर है कि कोरबा में महापौर बनने का सपना देखने वाले सत्ता पक्ष के नेता बोरिया बिस्तर समेट कर प्रयागराज कुंभ के कल्पवास के लिए निकल गए।

नेताजी का इस बात का मलाल हो रहा है साल भर की उनकी तैयारी धरी की धरी रह गई। उनकी पार्टी की सरकार है तो मेयर बनना पक्का हो जाता..मगर एक लाटरी ने उनके आरमानों पर पानी ​फेर दिया।

सूत्रधार की माने तो भाजपा के दिग्गज नेता तो मंदिरों में मन्नत का धागा और पंडित से हवन भी करा चुके थे। टिकट के भारी भरकम बजट और कार्यकर्ता तैयार कर चुनावी खाखा खिंच चुके हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि एल्युमिनियम कंपनी के नेता तो नगर निगम कार्यालय के आखिरी दिनों में महज इसलिए एक्टिव हुए थे कि चांस मिला तो खेला तो वे भी खेलेंगे।

अगर बात राजनीतिक भाई की जाए तो वे भी कमर कस कर चुनावी समर में उतरने तैयार थे। सामान्य महिला के लिए कुर्सी आरक्षित होने के बाद चुनाव लड़ने और लड़ाने वाले नेताओं सपना पूरा नहीं हो सका तो कल्पवास में ही दिन गुजारना पड़ रहा है।

 

 

🔶राजनीति की रामायण

 

 

 

छत्तीसगढ़ में निगम पंचायत चुनावों से पहले राजनीति की रामायण शुरु हो गई। इस रामायण के पहले प्रसंग ने प्रदेश की जनता का शर्मसार कर दिया। राजनीति की इस रामायण में भगवान राम के किरदार तो बताए मगर राम की मर्यादा को तारतार कर दिया।

सोशल मीडिया में जो वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है उसमें सत्ता पक्ष के मुखिया को राम और उनके सहयोगियों को राम सेना और विपक्ष के नेताओं को दंभी रावण की सेना के रूप में दिखाने की ओछी कोशिश हुई है।

राम और रामायण छत्तीसगढ़ की माटी में घुला है..लोगों की आस्था से जुड़े धार्मिक पात्रों को राजनीति में घसीटकर उनके चरित्र को नेताओं से जोड़ने की कोशिश कहीं से स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

और तो और इस वीडियो में कांग्रेस की महिला नेत्रियों को जिस तरह से चित्रित करने की कोशिश हुई है वो तो महिला सम्मान की बात करने वाली भगवा पार्टी के लिए शर्म की बात है।

अगर अपनी राजनीति चमकाने के लिए किसी छोटी सोच वाले नेता ने ये वीडियो जारी किया तो भी कम से कम पार्टी के टिकटैंक को इसकी निंदा तो करनी ही चाहिए थी..। असल में नेताओं ने अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए राम को दो घड़ों में बांट लिया..एक के लिए राम… सियापति राम हैं तो दूसरे के लिए भांचा राम…।

राम को भगवान मानने वालों के लिए जरूरी है कि वो उनकी बताए मर्यादा का पालन करें और जो लोग राम को भांचा मानकर अपनी दुकानदारी चला रहे हैं उन्हें भी ताकीद है कि वो अपने भांचा का मान रखे और यही छत्तीसगढ़ की संस्कृति है।

 

 

🔶 लहजा बता रहा ये शोहरत नई नई है..

 

 

 

मशहूर शायर की ये पंक्ति ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा, के आके बैठे हो पहली सफ़ में! अभी क्यों उड़ने लगे हवा में, अभी तो शोहरत नई नई है..की बाते जनमानस की जुबां पर है।

दरअसल कोरबा जिले में बीते दिन सरकार के दो मंत्री और शासन प्रशासन के सामने दुविधा वाली परिस्थित बन गई जब फ्लोरा मैक्स नाम की एक कंपनी की ठगी की शिकार हुईं महिलाओं ने करीब 2 घंटे तक मंत्री के काफिले को रोक लिया और उनकी पायलेट गाड़ी के आगे लेट गईंं। मंत्रियों के काफिला रोकने के बाद नेताजी को गुस्सा भी खूब आया और बोल गए टेंट और सड़क में बैठने वालों को उखाड़ फेकेंगे। फिर क्या था मामला उल्टा पड़ और महिलाये भी कहने लगी सरकार में बैठाये भी हम है और …!

मंत्री और प्रशासन के आगे दुविधा ये थी कि इन महिलाओं गुस्सा वाजिब था और सख्ती करने से बात बिगड़ सकती थी…। ऐसा पह​ली बार नहीं हुआ है् जब वित्तीय कारोबार करने वाली कंपनी ने यहां की महिलाओं से ठगी की हो। पहले भी बाहर से आई चिटफंड कंपनियां यहां से हजारों करोड़ों की ठगी करने जा चुकी है।

हालांकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने इन चिटफंड कंपनियों के संचालकों की गिरफ्तारी और उनकी संपत्ति जब्त कर लोगों के पैसे वापस करने की पहल की और काफी हद तक इसमें सफल भी रही।

अब फ्लोरा मैक्स नाम की एक कंपनी ने कोरबा सहित अन्य जिलों की तकरीबन 37 हजार महिलाओं से 500 करोड़ की ठगी की। लोन देने वाले बैंक रिकवरी लेटर भेज कर इन महिलाओें को परेशान कर रहे हैं।

ऐसे में सरकार को चाहिए कि वो इन महिलाओं की परेशानी समझे और फ्लोरा मैक्स और उससे जुड़े लोगों की संपत्ति कुर्क कर महिलाओं को इन परेशानियों से निजात दिलाए…।

 

     ✍️अनिल द्विवेदी, ईश्वर चन्द्रा

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