रायपुर

Supreme Court : चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जनवरी तक टली…! सुप्रीम कोर्ट बोले- सभी मुद्दों पर एक साथ होगी सुनवाई

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला

नई दिल्ली, 19 दिसंबर। Supreme Court : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई जनवरी 2026 के पहले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि यह मामला केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है और इसे ‘टुकड़ों’ में सुनना उचित नहीं होगा, बल्कि सभी संबंधित पहलुओं पर एक साथ विचार किया जाना चाहिए।

जनवरी तक की सुनवाई स्थगित

गुरुवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची की पीठ के समक्ष चैतन्य बघेल की ओर से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई गिरफ्तारी और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की कुछ धाराओं को चुनौती दी गई। चैतन्य बघेल को ईडी ने 18 जुलाई को कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। सुनवाई के दौरान चैतन्य बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि केंद्रीय जांच एजेंसियां दमनकारी और चयनात्मक कार्रवाई कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लगातार जांच जारी रखना और बार-बार नए वारंट जारी करना न्यायसंगत नहीं है। सिब्बल ने अदालत से मामले को समग्र दृष्टिकोण से देखने की मांग की। वहीं, ईडी की ओर से पेश अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने बताया कि चैतन्य बघेल की जमानत याचिका हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद सुरक्षित रखी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आरोपी न्यायिक हिरासत में है, तब दमनकारी कार्रवाई का आरोप कैसे लगाया जा सकता है। ईडी ने यह भी कहा कि आरोपी अन्य मामलों में अग्रिम जमानत की मांग कर रहा है, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला कई मुद्दों से जुड़ा हुआ है और इन सभी पर जनवरी में विस्तार से एक साथ सुनवाई की जाएगी। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले के अलावा महादेव बेटिंग ऐप, चावल मिल, कोयला और डीएमएफ घोटालों से जुड़े मामलों की जांच भी विभिन्न केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं। ये सभी मामले उस दौर से जुड़े हैं, जब राज्य में भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला (Chaitanya Baghel Hearing) आने वाले समय में इन मामलों की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।

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