
वाह जी! कोतवाली, तेरी बात है निराली…
शहर के पॉश एरिया में हुए जेसीबी से चोरी के बाद जनमानस कहने लगे है वाह जी कोतवाली,गजब है तेरी बात है निराली ..!
दरअसल मुख्य सड़क में स्थित गोदाम की दीवार को जेसीबी से तोड़कर चोरी कर ली जाए और रातभर किसी को भनक तक न लगे, इसे सुनकर आम लोग भी हंसते हुए कहने लगे हैं कि कानून व्यवस्था अब सीरियल की स्क्रिप्ट से भी ज्यादा रहस्यमय चल रही है।
दर्री रोड के कांग्रेसी नेता के गोदाम में हुई इस ‘’जेसीबी’’ कांड ने तो शहर में गपशप की आंधी ला दी है। लोग कह रहे“ये चोरी नहीं, कहानी का ओपनिंग सीन है।”कुछ तो दबी आवाज़ में फुसफुसा रहे।
“भैया, चोरी तो दिखावा है.. असली खेल जमीन का है!” सूत्रधार की मानें तो जिस जमीन पर गोदाम खड़ा है, वह किसी और की प्रापर्टी है। अब कब्जा खाली कराने का सीधा रास्ता शायद भारी पड़ रहा था, तो नया तरीका चुना गया पहले दीवाल तुड़वा दो फिर कथित कब्जाधारी से कब्जा खाली करा लो। हालांकि जमीन खाली तो नही हो पाई बल्कि चोरी की रिपोर्ट दर्ज हो गई।
पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों की जुबान का तंज भी गहरा है। किसी ने कहा“अरे भई, ये चोरी कम और स्क्रिप्टेड ड्रामा ज्यादा लग रहा है।” दूसरा बोला “जेसीबी से दीवार तोड़कर चोरी हो जाए तो समझ लो कहानी में ट्विस्ट वहीं से शुरू हो गया है।”
पुलिस अपनी जांच में लगी है, मगर शहर की चर्चा तो टर्बो मोड में चल रही है। हर गली में एक नया सवाल, हर सवाल के साथ एक ही जुमला… “वाह जी कोतवाली.. तेरी बात है निराली!”
टी-शर्ट, कान में बाली.. और अफसरगीरी की बात ही निराली!
भरी मीटिंग में जब साहब हाथ में कड़ा, कान में बाली और चमचमाती टी-शर्ट में ऐसे टपक पड़े मानो मंत्रणा नहीं, मिलान फैशन वीक में एंट्री मारने आए हों तो पूरा माहौल कुछ पल को ठिठक गया। बड़े साहब भी क्या करते, रोक न पाए और वहीं सुना दिया कि “भाई, अफसरों के भी कुछ नियम-कायदे होते हैं… यह सरकारी बैठक है, सेल्फी शूट नहीं!”
अब बात पिटाई वाले साहब की ही चल रही है। साहब का लुक देखकर आम लोग ही नहीं, खुद अफसर भी ताज्जुब में हैं। कहते हैं जवानी जब सिर चढ़कर बोलती है तो अंदाज भी अपने हिसाब से बदल जाता है। अफसरों के मामले में तो लोग मजाक में यही जोड़ दे रहे हैं कि एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा।
ऊपर से चर्चा और भी दिलचस्प है। सवाल उठ रहे हैं कि रंगबाज पटवारी के साथ साहब कर क्या रहे थे। यह भी मुद्दा बना है कि मारपीट की घटना में शासकीय कार्य में बाधा का मामला आखिर दर्ज कैसे हो गया। कानून को यूं मोड़ना तो कोई जिम में डम्बल मोड़ने जैसा काम समझ लिया है लगता है।
इन सब के बीच साहब का स्टाइल पूरे महकमे में चर्चा का विषय है। बड़े अफसर भी हैरान हैं कि यह मीटिंग में आया लुक था या किसी अगले फोटोशूट की तैयारी।
कुल मिलाकर चर्चा यही है कि महकमे में फाइलें धूल खा रही हैं और फैशन फड़फड़ा रहा है।
सौम्या की काली कमाई की तलाश में चोर डकैतों की जांच एजेंसी!
कोरबा की धरती पर केवल कोयला जैसा बहुमूल्य खनिज ही नहीं दबा है बल्कि भ्रष्टाचार का अकूत खजाना भी दबा है..अब देखिए ना पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओएसडी रह चुकीं सौम्या चौरसिया की काली कमाई की तलाश में उनके करीबी लोग चोर डकैतों के निशान पर आ गए हैं। ये शायद भारत का इकलौत ऐसा मामला होगा जिसमें ईडी, सीबीआई, एसीबी के बाद चोर डकैतों की जांच एजेंसी कोयला परिवहन में कमाई गई काली कमाई की तलाश कर रही है।
हाल ही में शहर के किसान शत्रुहन के घर हुई डकैती ने सभी चौंका दिया है। जनमानस में चर्चा है कि इस परिवार और सौम्या चौरसिया के बीच पुराना नाता है। शत्रुहन की बेटी बबीता बचपन में सौम्या के घर रहती थीं। यह भी कहा जाता है कि बबीता की पढ़ाई और शादी का खर्च सौम्या ने उठाया था।
डकैतों को शक है कि सौम्या की काली कमाई यही छिपी है। इसी की तालश मेंं डकैतों ने घर में जगह-जगह गड्ढे खोदे, दीवारों तक को खंगाला। अब सच क्या है, यह तो सौम्या चौरसिया, बबीता और उन लुटेरों को ही पता होगा। लेकिन, जो काम पुलिस और बाकी जांच एजेंसी को करना था उसे डकैती जैसी घटना को अंजाम देकर किया जाना समझ से परे है। डकैती की इस खबर ने शहर के नगर सेठों को भी चौका दिया है।
कांग्रेस की दिल्ली दौड़
सूबे की कांग्रेस में चल रहा संगठन सृजन अभियान अब छत्तीसगढ़ से निकल कर दिल्ली दरबार के लिए भी सर दर्द बना गया है। कटाक्ष के पिछले कालम में खबरीलाल ने पहले ..”ढाई साल छह महीने..” वाली खबर में इसका खुलासा किया था। खबर में दम था..दिल्ली में कई दौर की बातचीत के बाद भी डीसीसी और मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति का मामला अभी भी लटका हुआ है।
मामला सुलझता इससे पहले बृहस्पति सिंह ने पर्यवेक्षकों के दूतों पर नियुक्ति के लिए पैसे मांंगे जाने की बात कर बम फोड़ दिया..और अब संगठन सृजन अभियान की बात फिर होने लगी है। कांग्रेस के नेता दिल्ली दौड़ लगा रहे हैं।
खबरीलाल को खबर है कि पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत आज दिल्ली जा रहे हैं। जहां सचिन पायलट और कांग्रेस आलाकमान के साथ उनकी बैठक होना है। अब कांग्रेस नेताओं की दिल्ली दौड़ क्या रंग लाती है, इसके लिए सूची जारी होने का इंतजार करना होगा या मामला फिर .”ढाई साल छह महीने..” वाले लफड़े मे उलझ जाएगा।
सुशासन की पंच मशीन
हर महीने के आखिर में मीडिया में एक खबर जरूर होती है…1 तारीख से बदल जाएंगे ये नियम…जानें आपके ऊपर क्या होगा असर…गैस सिलेंडर के दाम बढ़े..क्रेडिट कार्ड से पेमेंट हुआ महंगा..आदि आदि। लेकिन, इस बार ये खबर मंत्रालय महानदी भवन में 15 दिन पहले से चल रही है।
असल में 1 दिसबंर से सुशासन वाली सरकार के प्रशासनिक मुखिया मंत्रालय में सचिवों के चैंबर के आगे पंच मशीन चिपका दिए हैं..जिसमें अफसरों को थंब इंप्रेशन लगाना और साहब कब आफिस पहुंचे कब निकले सब कुछ आनलाइन दर्ज होगा। अब साहब फला विभाग की मीटिंग में गए हैं वाला बहाना बंद।
लेकिन, मंत्रालय के एयरकंडिशन चैंबर में बैठने के आदि अफसरों को बायोमेट्रिक अटेंडेंस के राजी करना इतना आसान नहीं है। मगर जब से विकास शील मुख्य सचिव बने उनकी दो टूक से अफसरों को बायोमेट्रिक अटेंडेंस के राजी होना पड़ा।
वैसे भी विकास शील दिल्ली के अलग अलग मंत्रालय लंबे समय तक पोस्टेड रहे हैं। दिल्ली में भारत सरकार के सचिव से लेकर सेक्शन ऑफिसर और बाबू तक के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य है। वहीं व्यवस्था अब वो मंत्रालय में लागू कर रहे हैंं। अब देखना है कि सुशासन की ये पंच मशीन से मंत्रालय की ब्यूरोक्रेसी अपना तालमेल कैसे बैठाती है।



