Post Office Scheme: पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में 30 लाख जमा करें, हर साल ब्याज से पाएं 2.46 लाख रुपये, जानिए पूरा गणित

NPZ Desk
4 Min Read

Post Office SCSS Scheme: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई चाहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोस्ट ऑफिस की सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) एक विकल्प के तौर पर देखी जाती है। इस योजना में एकमुश्त रकम जमा करने के बाद ब्याज का भुगतान हर तीन महीने में किया जाता है। दी गई जानकारी के मुताबिक, 8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज दर पर यदि कोई पात्र निवेशक अधिकतम 30 लाख रुपये जमा करता है, तो सालभर में करीब 2.46 लाख रुपये ब्याज बन सकता है। यानी हर तिमाही लगभग 61,500 रुपये और मासिक औसत के हिसाब से करीब 20,500 रुपये की आय बैठती है। हालांकि, ब्याज दर स्थायी नहीं है और सरकार समय-समय पर छोटी बचत योजनाओं की दरों की समीक्षा करती है, इसलिए निवेश से पहले मौजूदा दर जरूर जांचनी चाहिए।

SCSS में कम से कम 1,000 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है, जबकि अधिकतम निवेश सीमा 30 लाख रुपये है। योजना की सामान्य अवधि पांच वर्ष होती है और पात्र निवेशक नियमों के तहत इसे आगे तीन वर्ष के लिए बढ़ा सकते हैं। आमतौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग इसमें खाता खोल सकते हैं। इसके अलावा 55 से 60 वर्ष की आयु में सुपरएनुएशन या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कुछ लोगों को भी निर्धारित शर्तों के साथ इसमें निवेश की अनुमति होती है। रक्षा क्षेत्र से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए भी अलग पात्रता प्रावधान हैं। वहीं NRI और HUF इस योजना में खाता नहीं खोल सकते। इसलिए निवेश करने से पहले अपनी पात्रता और योजना के ताजा नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।

कहां खुलेगा खाता और ब्याज पर क्या होगा टैक्स?

SCSS का खाता पोस्ट ऑफिस के अलावा अधिकृत बैंक शाखाओं में भी खोला जा सकता है। आवेदन के दौरान KYC से जुड़े दस्तावेज जैसे आधार, पैन और पहचान व पते का प्रमाण देना होता है। योजना का एक आकर्षण यह है कि निवेश पर मिलने वाला ब्याज तिमाही आधार पर प्राप्त होता है, जिससे नियमित नकदी की जरूरत वाले वरिष्ठ नागरिकों को सुविधा मिल सकती है। हालांकि, इस ब्याज को टैक्स के दायरे में रखा जाता है। लागू आयकर नियमों के अनुसार कुछ परिस्थितियों में ब्याज पर TDS भी कट सकता है। निवेश पर धारा 80C के तहत मिलने वाला टैक्स लाभ भी निर्धारित शर्तों और सीमा के अधीन होता है।

निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान

30 लाख रुपये के निवेश पर 2.46 लाख रुपये सालाना ब्याज का आंकड़ा 8.2 प्रतिशत की दर के आधार पर है। यदि सरकार भविष्य में ब्याज दर में बदलाव करती है, तो मिलने वाली आय भी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा समय से पहले पैसा निकालने, मैच्योरिटी और खाते के विस्तार से जुड़े नियम भी लागू होते हैं। इसलिए केवल ब्याज की रकम देखकर निवेश करने के बजाय अपनी जरूरत, टैक्स स्थिति, निवेश अवधि और मौजूदा सरकारी नियमों को ध्यान में रखना बेहतर है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए SCSS नियमित ब्याज आय का एक विकल्प हो सकता है, लेकिन किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले आधिकारिक नियमों और वर्तमान ब्याज दर की पुष्टि करना जरूरी है।

Share This Article