कोरबा

Poison Consumption : कोरबा में जहर खाने वाले किसानों के मामले में बड़ा खुलासा…! एक मामला फर्जी निकला…दूसरे में चौंकाने वाली सच्चाई आई सामने

एसईसीएल भू-अर्जन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जमीन सौदे

कोरबा, 15 जनवरी। Poison Consumption : हरदीबाजार तहसील क्षेत्र में टोकन नहीं कटने और रकबा रिकॉर्ड में सुधार नहीं होने को लेकर दो किसानों द्वारा कीटनाशक पदार्थ का सेवन किए जाने के मामलों की जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच के दौरान एक मामले में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जबकि दूसरे मामले में रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया पहले से जारी पाई गई।

जांच में निकली सच्चाई

सोमवार को हरदीबाजार तहसील के ग्राम पुटा निवासी किसान समार सिंह गोंड़ द्वारा टोकन नहीं कटने के कारण जहर सेवन किए जाने का मामला सामने आया था। घटना के बाद जब प्रशासन ने जांच शुरू की तो यह पाया गया कि जिस खसरा नंबर की भूमि के लिए किसान ने टोकन कटवाने का आवेदन दिया था, उस भूमि पर किसी प्रकार की फसल बोई ही नहीं गई थी। राजस्व अमले द्वारा मौके पर जाकर किए गए निरीक्षण में स्पष्ट हुआ कि संबंधित भूमि पर धान सहित कोई भी फसल नहीं ली गई थी।

पहले ही बेच दी थी जमीन

जांच में यह भी सामने आया कि जिस जमीन के आधार पर किसान धान बेचने का प्रयास कर रहा था, उसे वह पहले ही चांपा-जांजगीर निवासी राठौर नामक व्यक्ति को बेच चुका था। ऐसे में टोकन नहीं कटने को लेकर जहर सेवन किए जाने का मामला संदिग्ध और फर्जी प्रतीत हो रहा है।

एसईसीएल भू-अर्जन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जमीन सौदे

उल्लेखनीय है कि हरदीबाजार तहसील के कई गांव एसईसीएल के भू-अर्जन क्षेत्र में आते हैं, जहां जमीनों की खरीदी-बिक्री बड़े पैमाने पर हुई है। इसी वजह से जमीन स्वामित्व और रकबा रिकॉर्ड से जुड़े विवाद लगातार सामने आ रहे हैं।

दूसरा मामला: रिकार्ड अपडेट की प्रक्रिया थी जारी

मंगलवार को डगनिया झांझ निवासी एक अन्य किसान द्वारा तहसील कार्यालय में ही रकबा रिकॉर्ड में सुधार नहीं होने को लेकर जहर सेवन करने का मामला सामने आया था। इस मामले की जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि किसान के आवेदन पर तहसील के बाबू और तहसीलदार द्वारा रिकार्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई थी।

प्रशासन की ओर से किसान को यह जानकारी भी दी गई थी कि एक-दो दिनों के भीतर रिकार्ड अपडेट हो जाएगा, इसके बावजूद किसान द्वारा यह कदम उठाया गया।

प्रशासनिक जांच जारी

दोनों मामलों के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच के तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए आत्मघाती कदम उठाने के बजाय प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का सहारा लें।

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