Korba Satta: सट्टा किंग गिरफ्तार… मुचलके में बाहर आते ही फिर ‘खेल’ शुरू! आखिर किसके भरोसे चल रहा कारोबार?

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Korba Satta: कोरबा के कोतवाली थाना क्षेत्र में कथित सट्टा किंग की गिरफ्तारी और मुचलके पर रिहाई के बाद फिर कारोबार शुरू होने की चर्चाएं तेज हैं। संरक्षण के आरोपों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

कोरबा।Korba Satta:  कोतवाली थाना क्षेत्र में सट्टे के कथित कारोबार को लेकर एक बार फिर पुलिसिया कार्रवाई और उसके बाद की तस्वीर चर्चा में है। बुधवार को सट्टा कारोबार से जुड़े एक कथित किंग पर कार्रवाई हुई, लेकिन मुचलके में बाहर आने के बाद कारोबार के दोबारा शुरू होने की खबरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

कार्रवाई हुई, मुचलका हुआ और फिर वही पुराना खेल!
नमन विहार के समीप लंबे समय से सट्टे के कारोबार को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। बुधवार को पुलिस ने कार्रवाई की तो लगा कि शायद अब इस ‘खेल’ पर ब्रेक लगेगा। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई के कुछ ही समय बाद कथित तौर पर फिर से सट्टे का कारोबार शुरू हो गया।

अब सवाल यह है कि अगर पुलिस की कार्रवाई के बाद भी कथित सट्टा कारोबार इतनी जल्दी पटरी पर लौट आता है, तो आखिर इसके पीछे किसका भरोसा है?

बड़े साहबों’ का नाम लेकर दबदबा बनाने का दावा!

स्थानीय चर्चाओं और सूत्रों के मुताबिक, सट्टा संचालित करने वाला कथित किंग कुछ उच्च अधिकारियों के नाम का हवाला देकर इलाके में अपना दबदबा कायम रखने की कोशिश करता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मगर सवाल गंभीर है। अगर कोई व्यक्ति अफसरों के नाम का इस्तेमाल कर खुलेआम पुलिसिया कार्रवाई को हल्का साबित करने की कोशिश कर रहा है, तो क्या पुलिस इसकी तह तक जाएगी?

मुचलका बना ‘री-एंट्री पास’?

कार्रवाई के बाद मुचलके पर रिहाई कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है, लेकिन उसके बाद यदि वही कारोबार फिर शुरू होने की शिकायतें सामने आती हैं तो पुलिस की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

एक तरफ पुलिस कार्रवाई का दावा, दूसरी तरफ फिर वही सट्टे का खेल…

तो क्या कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई? या फिर सट्टा बाजार में ऐसा कोई ‘वीआईपी पास’ है, जो कार्रवाई के बाद भी कारोबार को दोबारा चालू करा देता है?

अब निगाहें कोतवाली पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं। देखना होगा कि पुलिस इन आरोपों और कथित संरक्षण के दावों की जांच करती है या फिर ‘कार्रवाई हुई, मामला शांत हुआ और सट्टा फिर चालू’ वाला खेल यूं ही चलता रहेगा।

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