Korba News: शहर में सट्टे का खेल बेखौफ, खाकी की खामोशी पर उठे सवाल! ‘अदृश्य आशीर्वाद’ की चर्चा

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Korba News “करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है… मेरी आपकी कृपा से, सब काम हो रहा है!” भजन की यह पंक्तियाँ इन दिनों शहर के सटोरियों की जुबां पर पूरी तरह मुफीद बैठ रही हैं। शहर में सट्टे का काला कारोबार एक बार फिर तेजी से सिर उठा रहा है। चर्चा है कि इस अवैध खेल को किसी ‘अदृश्य महाशक्ति’ का वरदहस्त प्राप्त है। चाय की टपरियों से लेकर चौक-चौराहों तक लोग यही पूछ रहे हैं कि आखिर वह कौन सा ‘मास्टरमाइंड’ है, जिसके इशारे पर यह पूरा नेटवर्क फल-फूल रहा है?

 

सट्टा केवल अंकों का खेल नहीं है। इसके पीछे बहता धन, टूटते परिवार और अपराध की ओर बढ़ते कदम समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसे में जब शहर में इस अवैध कारोबार की चर्चाएं खुलेआम होने लगें, तो सबसे बड़ा सवाल कानून-व्यवस्था की निगरानी पर ही उठता है।

 

फिल्म सिंघम का एक मशहूर डायलॉग  “पुलिस की एंट्री भले ही लेट होती है, पर सबसे बेस्ट होती है।” मगर शहर के मौजूदा हालात इस संवाद पर भी जैसे व्यंग्य कर रहे हैं।

 

आम जनता को तो अपनी गली में खड़ी एक संदिग्ध बाइक भी खटकने लगती है, लेकिन खाकी की दूरबीन में न जाने कौन सी धुंध छा गई है कि उसे पूरा का पूरा सट्टा बाजार ही ओझल नजर आता है। इसे देखकर तो बस यही कहा जा सकता है “कानून के हाथ लंबे जरूर होते हैं, लेकिन कभी-कभी वो कुछ खास जेबों तक ही सिमट कर रह जाते हैं।”

 

सूत्रधार तो दबी जुबान में यह भी कह रहे हैं कि मामला कुछ और नहीं बल्कि, “नजर तो सब पर है साहब, बस कुछ खास जगहों पर चश्मा थोड़ा धुंधला कर लिया जाता है।” अब देखना यह है कि शहर की कप्तान और उनकी टीम इस धुंधले चश्मे को साफ करके सटोरियों पर कानूनी हंटर चलाती है, या फिर सट्टे का यह बाजार ‘अदृश्य आशीर्वाद’ के सहारे यूं ही सरपट दौड़ता रहेगा।

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