
कोरबा। नगर निगम में टेंडर मैनेजमेंट को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि निगम के भीतर सक्रिय टेंडर मैनेज गैंग ने इस बार (Tender issued without signature of sub-engineer) सब इंजीनियर के हस्ताक्षर के बिना ही निविदा जारी करवा दी, ताकि पसंदीदा इलेक्ट्रिकल इंजीनियर से मूल्यांकन कराया जा सके।

सरकार बदलने के बाद नगर निगम में कथित तौर पर टेंडर मैनेजमेंट के खेल खुलकर सामने आ रहे हैं। ताजा मामला शहर की सड़कों पर विद्युत पोल में लगाए गए रोप लाइट कार्य से जुड़ा है। जारी निविदा प्रपत्र में सब इंजीनियर के हस्ताक्षर ही नहीं हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि किसी चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए पूरी प्रक्रिया को जानबूझकर कमजोर किया गया।
मैन्युअल टेंडर की आड़ में खेल
शासन की गाइडलाइन के अनुसार 10 लाख रुपये से कम के कार्यों के लिए मैन्युअल टेंडर की व्यवस्था है। आरोप है कि इसी प्रावधान का दुरुपयोग करते हुए करीब 20 लाख रुपये के कार्य को दो हिस्सों में बांटकर 10 लाख से कम का दिखाया गया। मकसद यह बताया जा रहा है कि टेंडर प्रक्रिया को सीमित दायरे में रखकर सेटिंग के जरिए ठेकेदार को काम दिलाया जाए और बदले में मोटी कमीशनखोरी की जाए। मामले ने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अफसरों पर कोई कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।



