
कोरबा।Korba Employees Protest DA आम दिनों जैसा नहीं था बुधवार का लंच ब्रेक। घड़ी ने जैसे ही दोपहर का वक्त बताया, दफ्तरों से कर्मचारी-अधिकारी बाहर निकले और देखते ही देखते सड़कें आंदोलन के मंच में बदल गईं। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले सैकड़ों लोग एकजुट हुए और कलेक्ट्रेट की ओर कूच कर गए।
Korba Employees Protest DA जिला संयोजक जगदीश खरे के नेतृत्व में निकली यह रैली सिर्फ औपचारिक विरोध नहीं थी, बल्कि लंबे समय से दबे असंतोष का खुला इज़हार थी। “अब नई सहिबो, अब नहीं सहिबो – मोदी की गारंटी लेके रहिबो” के नारों ने पूरे कलेक्ट्रेट परिसर को गरमा दिया।
मांगें वही… लेकिन तेवर नए
प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त कलेक्टर माधुरी सोम ठाकुर के जरिए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। सबसे ज्यादा जोर उस महंगाई भत्ता (DA) एरियर्स पर रहा, जो जुलाई 2016 से लंबित बताया जा रहा है। कर्मचारियों की मांग साफ है, बकाया राशि सीधे जीपीएफ खाते में जोड़ी जाए।
मुद्दे जो बार-बार उठ रहे है।
प्रदर्शन में डॉ. तरुण सिंह राठौर, ओमप्रकाश बघेल समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी-अधिकारी शामिल रहे। भीड़ और तेवर दोनों बता रही हैं कि यह मामला अब लंबा खिंच सकता है।
इस बार भी कई पुराने मुद्दे नए तेवर के साथ सामने आए
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समयमान वेतनमान और चार स्तरीय पदोन्नति
300 दिन तक अवकाश नगदीकरण
वेतन विसंगतियों पर पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट
शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ
अनुकंपा नियुक्ति की सीमा खत्म करने की मांग
पंचायत सचिवों का शासकीयकरण
नगरीय निकाय कर्मचारियों के लिए नियमित वेतन
रिटायरमेंट उम्र 65 साल करने की मांग



