
KORBA BREAKING कोरबा। जिले के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक ऐसा फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अधिकारी का तबादला हो चुका था, उसे न तो पुराने पद से रिलीव किया गया और न ही नई जगह ज्वाइनिंग की प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन इसी बीच उसे जनपद पंचायत पाली का मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) बना दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक ट्रांसफर आदेश जारी होने के बावजूद रिलीविंग और ज्वाइनिंग को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं बनाई गई। इसके बावजूद नई जिम्मेदारी सौंपना प्रशासनिक नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी माना जा रहा है। इसी असमंजस के बीच अब पूरा मामला और उलझता नजर आ रहा है।
जिला प्रशासन ने अनधिकृत अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कोरबा के आदेश से जनपद पंचायत पाली के CEO भूपेंद्र कुमार सोनवानी को तत्काल प्रभाव से उनके दायित्व से हटा दिया गया है। आदेश में उल्लेख है कि श्री सोनवानी 28 जनवरी 2026 से बिना अनुमति अनुपस्थित पाए गए।
प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए जिला पंचायत कोरबा में पदस्थ सहायक परियोजना अधिकारी मोहनिश आनंद देवांगन को आगामी आदेश तक जनपद पंचायत पाली के CEO का अस्थायी प्रभार सौंपा गया है। वहीं भूपेंद्र कुमार सोनवानी को अगले आदेश तक जिला पंचायत कोरबा में संलग्न किया गया है। कलेक्टर ने साफ किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंचायत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अधिकारी वर्ग फिलहाल इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। न रिलीविंग को लेकर स्थिति स्पष्ट की जा रही है और न ही यह बताया जा रहा है कि बिना पूरी प्रक्रिया के पोस्टिंग कैसे दी गई।
सूत्रों का कहना है कि अनधिकृत अनुपस्थिति के मामले में आगे विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला महज एक प्रशासनिक चूक बनकर खत्म होता है या फिर किसी बड़े प्रशासनिक खेल की परतें खुलती हैं।



