सारंगढ़-बिलाईगढ़, 22 जनवरी। Justice : जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति उस समय सबके सामने आ गई, जब फरियाद लेकर एक आम आदमी नहीं, बल्कि खुद तहसीलदार को धरने पर बैठना पड़ा। सारंगढ़-बिलाईगढ़ के सारंगढ़ कोतवाली थाना के मुख्य गेट पर तहसीलदार वन्दे राम भगत ने अनशन पर बैठकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। यह दृश्य किसी आंदोलनकारी का नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र की संवेदनहीनता और लचर कार्यप्रणाली पर करारा तमाचा माना जा रहा है।
अनशन का कारण
तहसीलदार वन्दे राम भगत का आरोप है कि उन्होंने कई बार पुलिस से एक मामले में उचित कार्रवाई की गुजारिश की, लेकिन पुलिस ने उनकी बात को अनसुना कर दिया। उनके मुताबिक, संबंधित मामले में पुलिस की लापरवाही और अनदेखी के कारण पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा था, और यही कारण था कि उन्हें अंततः अनशन का रुख अपनाना पड़ा।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
तहसीलदार के अनशन ने प्रशासनिक व्यवस्था के समक्ष गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक प्रशासनिक अफसर द्वारा ऐसी स्थिति में न्याय की मांग करना अपने आप में पुलिस तंत्र की लापरवाही और कार्यप्रणाली पर गहरी चिंता का विषय बन गया है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं पुलिस की कार्यशैली में सुधार की आवश्यकता है, ताकि जनता का विश्वास बहाल किया जा सके।
तहसीलदार का संघर्ष
तहसीलदार ने अपने अनशन में यह भी कहा कि जब एक प्रशासनिक अधिकारी को न्याय के लिए इस तरह से मजबूर होना पड़ता है, तो आम जनता का क्या हाल होगा। उनका कहना था कि यह केवल एक प्रशासनिक अधिकारी का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे जिले के नागरिकों के लिए एक गंभीर चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से शीघ्र न्याय दिलाने की अपील की।
प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का जवाब
जब तहसीलदार का अनशन बढ़ने लगा, तो जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन दोनों के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने तहसीलदार से मुलाकात की और मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही, पुलिस अधीक्षक ने मामले में उचित जांच और कार्रवाई की बात कही।
यह घटना पुलिस प्रशासन और न्याय व्यवस्था के बीच तालमेल की आवश्यकता को स्पष्ट करती है, जिससे प्रशासनिक अधिकारियों का विश्वास फिर से स्थापित हो सके।