
कोरबा।Strike वेतन विसंगतियों सहित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर शासकीय सेवकों ने तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान तो बड़े जोश से किया, लेकिन धरना स्थल पर जो नज़ारा दिखा, वह सरकार से ज्यादा पर्यटन विभाग के लिए राहत भरा साबित हो रहा है।
29 से 31 दिसंबर तक हड़ताल के चलते कलेक्ट्रेट से लेकर स्कूलों तक ताले लटके हैं। दफ्तरों में सन्नाटा है और स्कूलों में शिक्षक ऐसे गायब हैं जैसे उन्हें एलआईसी की पॉलिसी के साथ अदृश्य होने का बोनस मिल गया हो। परीक्षा सिर पर है, पाठ्यक्रम अधूरा है, लेकिन शिक्षक महोदय “आंदोलन मोड” में नहीं, बल्कि “टूर मोड” में नजर आ रहे हैं।
हड़ताल का आवेदन देना भर औपचारिकता रह गई है। एक तय फार्मेट में सूचना दी और फिर सीधे कुल्लू-मनाली, गोवा, ऋषिकेश, केरल, दिल्ली, प्रयागराज, बालाजी मंदिर, नेपाल जैसे गंतव्यों की ओर प्रस्थान। मानो हड़ताल नहीं, कोई ऑल इंडिया टूर पास जारी हो गया हो।
शीतकालीन अवकाश से लौटने वाले शिक्षकों के लिए तो यह हड़ताल सोने पर सुहागा साबित हुई। जिस दिन स्कूल खुलने थे, उसी दिन हड़ताल का ऐलान हो गया और छुट्टी एक्स्ट्रा हॉलीडे बोनस में तब्दील हो गई।
न अनुमति की झंझट, न सूचना की टेंशन
धरना स्थल पर हालात यह हैं कि गिनती के कुछ बड़े पदाधिकारी ही कुर्सी संभाले बैठे दिखते हैं। बाकी अधिकारी-कर्मचारी कहां हैं, किस दिशा में हैं, किस टूर पैकेज पर हैं, इसकी जानकारी शायद जीपीएस को भी नहीं। कुल मिलाकर, यह हड़ताल सरकार पर दबाव बनाने से ज्यादा कर्मचारियों के लिए “वर्क फ्रॉम नो-व्हेयर” और “धरना फ्रॉम टूरिस्ट स्पॉट” साबित हो रही है। मांगें पूरी हों या न हों, सैर-सपाटा जरूर सफल होता दिख रहा है।




One Comment