DMF Scam : 9,188 करोड़ की DMF राशि में बड़े डायवर्जन का ED का दावा, सतपाल छाबड़ा गिरफ्तार, 31 करोड़ के अवैध कमीशन का खुलासा

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रायपुर, 15 सितंबर। DMF Scam : छत्तीसगढ़ के चर्चित DMF निधि गबन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) रायपुर आंचलिक कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने धरमपाल सिंह छाबड़ा के पुत्र सतपाल सिंह छाबड़ा को PMLA 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ और जांच में ED ने DMF फंड के कथित दुरुपयोग, कमीशन नेटवर्क और करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने का दावा किया है।

DMF फंड के इस्तेमाल पर ED की जांच में बड़ा खुलासा

ED ने ACB/EOW रायपुर और छत्तीसगढ़ पुलिस की FIR के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाए गए DMF ट्रस्टों का कथित तौर पर लोक सेवकों, लायजनरों और विक्रेताओं के संगठित सिंडिकेट ने दुरुपयोग किया।

ED के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच जिलों को DMFT के तहत करीब 9,188.20 करोड़ रुपये मिले। जांच में आरोप है कि इस राशि के एक बड़े हिस्से को निर्धारित उद्देश्यों से हटाकर ऐसे सप्लाई-बेस्ड कार्यों में लगाया गया, जहां कीमतों को बढ़ाकर दिखाने और कमीशन लेने की ज्यादा गुंजाइश थी। एजेंसी के मुताबिक, इस राशि का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम यानी बीज निगम के माध्यम से भेजा गया।

ठेका फर्मों से 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन का आरोप

जांच में ED ने दावा किया है कि DMF से जुड़े जिलों में अफसरों के कथित दलालों ने रेट कॉन्ट्रैक्ट होल्डर संस्थाओं के पक्ष में जारी खरीद आदेशों के आधार मूल्य पर 25 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला।

एजेंसी के मुताबिक, इस कथित कमीशन का एक बड़ा हिस्सा कार्य आदेश जारी कराने और भुगतान करवाने के लिए लोक सेवकों तथा प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया जाता था। इस पूरे नेटवर्क में लायजनरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

सतपाल छाबड़ा की भूमिका पर ED का बड़ा दावा

ED के मुताबिक, सतपाल सिंह छाबड़ा इस कथित सिंडिकेट में प्रमुख लायजनर और वित्तीय समन्वयकों में से एक था। एजेंसी का आरोप है कि वह ज्यादा कमीशन वाले सप्लाई-बेस्ड DMFT कार्यों की पहचान करता था और उन्हें प्रतिशत के आधार पर अलग-अलग विक्रेताओं में बांटता था।

जांच एजेंसी के अनुसार, सतपाल छाबड़ा कार्य आदेश और भुगतान की प्रक्रिया में कथित तौर पर सुविधा उपलब्ध कराता था और विक्रेताओं से प्राप्त कमीशन को सिंडिकेट के सदस्यों के बीच वितरित करता था।

31 करोड़ रुपये के कथित अवैध कमीशन का खुलासा

ED का दावा है कि बैंकिंग लेनदेन और PMLA की धारा 17 तथा 50 के तहत दर्ज बयानों की जांच से सामने आया कि सतपाल छाबड़ा को करीब 31 करोड़ रुपये का कथित अवैध कमीशन मिला। एजेंसी इसे अपराध से अर्जित आय यानी Proceeds of Crime बता रही है।

ED के अनुसार, यह रकम आरोपी, उसके परिवार, HUF और उसके नियंत्रण वाली संस्थाओं के बैंक खातों में पहुंची। इससे पहले 3 और 4 सितंबर 2025 को PMLA की धारा 17(1) के तहत की गई तलाशी के दौरान भी जांच से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे। मामले में ED की आगे की जांच जारी है।

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