
प्रतीकात्मक तस्वीर
कोरबा । स्पा सेंटर सिर्फ मसाज नहीं बेचते। यहां नाम बिकते हैं, नंबर बिकते हैं और वो पल बिकते हैं, जो बाहर आ जाएं, तो इज्जत से पहले कुर्सी गिरती है। शहर में इन दिनों एक प्रश्न चिमनी से निकले राख की तरह चारों ओर बरस रहा है अगर डायरी खुल गई तो सबसे पहले पसीना किसका छूटेगा?बिलासपुर के स्पा से खाकी की वसूली की खबर क्या हवा में तैरी, कोरबा के एसी दफ्तरों में मौसम अचानक उमस भरा हो गया।वजह साफ है। यहां भी सब कुछ “जानकारी में” चलता रहा है, बस लिखित में कभी नहीं आया। कहते हैं अवैध काम बिना संरक्षण के नहीं चलता और जब संरक्षण मौन में मिले, तो शिकायत भी मौन ही रह जाती है। लेकिन समस्या तब खड़ी होती है जब मौन टूटने लगे और लाल डायरी की स्याही बोलने को तैयार हो जाए। शहर के पॉम मॉल, सिटी सेंटर, अभिनंदन कॉम्प्लेक्स और कॉफी हाउस के सामने वाली स्पा सेंटरों में आने वाले “विशेष” ग्राहकों का हिसाब किताब सिर्फ कैश बुक में नहीं, एक अलग डायरी में रखा जाता है। नाम, नंबर और वो पल, जिन्हें याद रखना भी खतरे से खाली नहीं। यही लाल डायरी जरूरत पड़ने पर एटीएम बन जाती है। बटन कोई और दबाता है, नोट कोई और उगलता है। खबरीलाल बताते हैं कि यहां काम करने वाली युवतियों में कई दिल्ली, हरियाणा और विदेश से बुलाई गई है। जिनके वीजा पर भी सवाल उठ रहे है। वीज़ा पर सवाल हैं, मगर सवाल पूछने वाले अक्सर सिस्टम से बाहर हो जाते हैं। शहर में चर्चा ये भी है कि स्पा सेंटर के लाल डायरी में सिर्फ लक्ष्मीपुत्रों के नाम नहीं हैं। खाकी के कुछ नाम भी स्याही में दर्ज हैं। डंडे के दम पर मिलने वाली एक्स्ट्रा सर्विस और खामोशी का सौदा समय समय पर अपडेट होता रहा है। शहर में चल रहे स्पा पर दुर्ग के तत्कालीन रहे एसपी अभिषेक पल्लव का पुराना वीडियो की याद आने लगी है। वीडियो देखकर स्पा प्रेमी अब मजा कम और चिंता ज्यादा कर रहे हैं। डर ये नहीं कि कानून आएगा, डर ये है कि कहीं फोटो बाहर आ गई तो धन के साथ पुण्य भी चला जाएगा। अब सवाल ये नहीं कि स्पा में क्या चल रहा है। सवाल ये है कि अगर लाल डायरी खुल गई तो सस्पेंशन की फाइल किस टेबल से चलेगी और किस टेबल पर रुक जाएगी,क्योंकि शहर जानता है..डायरी लाल है, स्याही गहरी है और खामोशी सबसे बड़ी साझेदार।



