Bihar Election 2025: जन सुराज की पहली लिस्ट से डेढ़ दर्जन विधायकों की नींद उड़ी, BJP के लिए बनी नई चुनौती

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पटना। प्रशांत किशोर (PK) की अगुवाई वाली जन सुराज पार्टी (Jan Suraaj Party) की पहली प्रत्याशी सूची जारी होते ही बिहार की सियासत में हलचल मच गई है। पार्टी की इस सूची में ऐसे उम्मीदवार शामिल हैं जो कई सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के लिए सीधी चुनौती बन सकते हैं।

सूची में मुजफ्फरपुर, दरभंगा, कुम्हरार, सोनपुर, प्राणपुर, आरा और गोपालगंज सहित लगभग 18 विधानसभा सीटें शामिल हैं। इनमें से कई सीटों पर भाजपा ने 2020 में बहुत कम अंतर से जीत हासिल की थी। अब जन सुराज पार्टी की मौजूदगी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भले ही जन सुराज बड़ी संख्या में सीटें न जीते, लेकिन वह भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है, जिसका लाभ विपक्षी गठबंधन को मिल सकता है। पार्टी का फोकस शिक्षित, सामाजिक रूप से सक्रिय और युवा चेहरों पर है।

पीके की ‘जनसंवाद यात्रा’ और ‘सिस्टम बदलने’ के संदेश ने युवाओं में असर छोड़ा है। यही वजह है कि कई भाजपा प्रत्याशी अब जन सुराज को मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानकर अपनी रणनीति बदल रहे हैं।

कुछ प्रमुख सीटों पर समीकरण बेहद रोचक हो गए हैं

  • दरभंगा में पूर्व डीजी आर.के. मिश्र को उतारकर भाजपा मंत्री संजय सरावगी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी गई हैं।
  • गोपालगंज से डॉ. शशि शेखर सिन्हा के मैदान में आने से भाजपा की कुसुम देवी के लिए चुनौती बढ़ी है, जो उपचुनाव में केवल 2183 वोटों से जीती थीं।
  • प्राणपुर में पूर्व मंत्री विनोद सिंह की पत्नी निशा सिंह भी 2020 में मुश्किल से 2972 वोटों के अंतर से सीट निकाल पाई थीं।
  • सोनपुर में कुशवाहा समाज के चंदनलाल मेहता को टिकट देकर जन सुराज ने यादव-राजपूत समीकरणों में नई पेचीदगी पैदा कर दी है।

भाजपा का दावा है कि उसका संगठन मजबूत है और जन सुराज का असर सीमित रहेगा। लेकिन जमीनी समीकरण बताते हैं कि कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला भाजपा के लिए सिरदर्द बन सकता है।

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