Balko Kisan Mela : कृषि नवाचार और सतत आजीविका को मिला बढ़ावा…40 गांवों के 750 किसान हुए शामिल…आधुनिक खेती पर व्यापक प्रशिक्षण

News Power Zone
3 Min Read
Balko Kisan Mela
बालकोनगर, 29 दिसंबर। Balko Kisan Mela : वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने किसान दिवस के अवसर पर बेला और सोनगुढ़ा गांव में किसान मेला-2025 का आयोजन किया। इस मेले में 40 गांवों से 750 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में तकनीकी विशेषज्ञ, सरकारी अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि और कृषि उद्यमी भी शामिल हुए। बालको ने यह आयोजन बायफ, सतत आजीविका एवं विकास संस्थान के सहयोग से किया। मेले में कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन और फसल बीमा से जुड़ी आधुनिक तकनीकों पर चर्चा और प्रदर्शन किए गए। बालको की ‘मोर जल मोर माटी’ परियोजना के तहत किसानों को वितरित किए गए कृषि उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई गई। नकटीखार स्थित हाई-टेक नर्सरी से जुड़े स्टॉल पर गुणवत्तापूर्ण पौधों की जानकारी दी गई। किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के स्टॉल में किसानों को समूह बनाकर काम करने और बाजार से जुड़ने के लाभ बताए गए। इसके अलावा मारुत ड्रोन, क्रॉम्पटन मोटर, बिड़ला पाइप और कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के स्टॉल के माध्यम से आधुनिक तकनीक, सिंचाई समाधान, सरकारी योजनाओं और कृषि आधारित स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी गई। बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा में किसानों की भूमिका अहम है। बालको में केवल तकनीक या प्रशिक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों को आय के नए अवसर और आत्मनिर्भर बनाने पर काम किया जा रहा है। ‘मोर जल मोर माटी’ जैसी पहल के जरिए कृषि, बागवानी और पशुपालन को लाभकारी आजीविका के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। रोगबहरी गांव के किसान अर्जुन कंवर ने कहा कि बालको के सहयोग से उनकी खेती में बड़ा बदलाव आया है। प्रशिक्षण से उन्हें बेहतर खेती, उत्पादन वृद्धि और लागत में कमी जैसी महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इस साल बेहतर खेती अपनाने के लिए उन्हें सम्मान भी मिला, जिससे वे अन्य किसानों को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित हुए। ‘मोर जल मोर माटी’ परियोजना जल प्रबंधन, बहुफसली खेती, बागवानी और पशुपालन को बढ़ावा देती है। यह परियोजना 3,200 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 8,000 से ज्यादा किसानों तक पहुंच चुकी है। अब तक 6,000 से अधिक किसानों ने आधुनिक खेती के तरीके अपनाए हैं, जिससे उनकी आमदनी और उत्पादन में वृद्धि हुई है। लगभग 25 प्रतिशत लाभार्थी युवा किसान हैं, जो दिखाता है कि युवाओं में खेती को आजीविका के रूप में अपनाने की रुचि बढ़ रही है। सरकारी योजनाओं और संस्थागत सहयोग से किसानों को जोड़कर बालको ग्रामीण आजीविका को मजबूत कर रहा है और छत्तीसगढ़ में टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा दे रहा है। यह पहल दिखाती है कि ज्ञान, नवाचार और सहयोग से किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
Share This Article