Chhattisgarh PMGSY Scam: सड़क जमीन पर नहीं, फाइलों में दौड़ती रही! 24 सड़कों का ₹45 करोड़ भुगतान, 25 अफसरों को नोटिस, 15 ठेकेदारों से होगी वसूली

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Chhattisgarh PMGSY Scam : बीजापुर में PMGSY का बड़ा खेल उजागर: बिना सड़क बनाए केंद्रीय पोर्टल पर चढ़ा दी फर्जी एंट्री, अब जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की तैयारी

रायपुर। Chhattisgarh PMGSY Scam: छत्तीसगढ़ के बीजापुर में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी निर्माण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 24 सड़कों का काम जमीन पर पूरा हुआ या नहीं, लेकिन भुगतान की फाइल जरूर दौड़ गई। आरोप है कि बिना मौके पर सड़क की जांच किए करीब ₹45 करोड़ का भुगतान कर दिया गया और केंद्रीय पोर्टल पर भी काम पूरा होने की फर्जी एंट्री दर्ज कर दी गई।

मामला सामने आने के बाद अब शासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिम्मेदारी तय करने के लिए 25 अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि संबंधित 15 ठेकेदारों से भुगतान की राशि वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय में राशि जमा नहीं करने पर ठेकेदारों के खिलाफ FIR की चेतावनी भी दी गई है।

सड़क बनी नहीं, भुगतान कैसे निकल गया?

इन सड़कों को वर्ष 2018-19 में स्वीकृति मिली थी और बाद में निर्माण कार्य शुरू किया गया। लेकिन विभागीय जांच और ग्राउंड रिपोर्ट ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सड़क मौके पर बनी ही नहीं थी तो अफसरों ने किस आधार पर काम का सत्यापन किया और भुगतान जारी कर दिया?

इतना ही नहीं, केंद्रीय पोर्टल पर काम पूरा होने की एंट्री दर्ज किए जाने ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब जांच का फोकस सिर्फ ठेकेदारों पर नहीं, बल्कि सत्यापन से लेकर भुगतान और ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करने तक की पूरी प्रक्रिया पर है।

ग्राउंड पर खुली पोल: आवापाली-कोटापाली सड़क का मामला

ग्राउंड रिपोर्ट में आवापाली-कोटापाली रोड का मामला भी सामने आया। मौके पर डामर की सड़क दिखाई देती है, लेकिन वहां लगे बोर्ड पर एजेंसी PWD बताई गई है। आसपास ऐसा कोई स्पष्ट सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि संबंधित PMGSY सड़क पहले बनाई गई थी।

स्थानीय लोगों के मुताबिक इलाके में पहले कच्ची सड़क थी और अब पहली बार पक्की सड़क बन रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर सड़क पहले बनी थी तो वह जमीन पर कहां थी और उसका भुगतान किस काम के लिए हुआ?

25 अफसरों पर गिरी गाज

मामले में अधीक्षण अभियंता से लेकर उप अभियंता तक कुल 25 अफसरों को शो कॉज नोटिस जारी किया गया है। इनमें कुछ अधिकारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।

बताया गया है कि के.आर. शास्त्री, विजय कोमरे, आर.के. साहू, पी.एम. साहू और एम.पी. खरे समेत कई अधिकारी अब सेवानिवृत्त हैं। वहीं एस.एल. कुर्रे संविदा पर हैं।

यदि नोटिस के जवाब से शासन संतुष्ट नहीं हुआ तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। सेवानिवृत्त अधिकारियों के मामले में पेंशन पर भी असर पड़ने की संभावना जताई गई है।

15 ठेकेदारों से होगी वसूली

फर्जी भुगतान के आरोपों के घेरे में आए 15 ठेकेदारों से राशि वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें पी.एस.ए कंस्ट्रक्शन, सोनी कंस्ट्रक्शन, गुप्ता कंस्ट्रक्शन कंपनी, रविन्दर सिंह ढिल्लन, बाफना कंस्ट्रक्शन, आईकॉन इन्फ्रास्ट्रक्चर, एम.एस.आर. कंस्ट्रक्शन, मो. फिरोज कंस्ट्रक्शन, चन्द्रप्रकाश सिंह, सज्जन गुप्ता, धनगल बिल्डर्स, श्रीग कंस्ट्रक्शन, कुलकर्णी एंड साहू बिल्डकॉन प्रा. लि. और गंगा कंस्ट्रक्शन सहित अन्य शामिल हैं।

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि समय सीमा में राशि वापस नहीं करने पर FIR की कार्रवाई की जा सकती है।

रिटायर अफसरों तक पहुंचेगा जांच का शिकंजा?

मामले में तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका अब जांच के केंद्र में है। शो कॉज नोटिस के जवाब सामने आने के बाद तत्कालीन ईएनसी अरविंद राही से भी जवाब तलब किए जाने की बात कही गई है।

यानी अब जांच सिर्फ यह नहीं कि सड़क बनी या नहीं, बल्कि यह भी होगी कि बिना निर्माण के भुगतान की पूरी प्रक्रिया में किस-किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।

बस्तर में ठेकेदारों पर भी कार्रवाई

इधर बस्तर संभाग में निर्माण कार्यों में लापरवाही के मामलों में लोक निर्माण विभाग ने भी कार्रवाई की है। कई ठेकेदारों के पंजीयन नवीनीकरण पर रोक लगाई गई है, जबकि कुछ के पंजीयन निरस्त किए गए हैं।

अब बड़ा सवाल यही है: बीजापुर की 24 सड़कों में यदि करोड़ों का भुगतान बिना वास्तविक निर्माण के हुआ, तो इस पूरे खेल में सिर्फ ठेकेदार जिम्मेदार हैं या सत्यापन से लेकर भुगतान तक की पूरी सरकारी मशीनरी भी जवाबदेह होगी?

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