BJP संगठन में बड़ा फेरबदल… सात राष्ट्रीय मोर्चों के प्रभारियों का ऐलान, जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी

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नई दिल्ली, 10 सितंबर। BJP ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए सात राष्ट्रीय मोर्चों के प्रभारियों की घोषणा कर दी है। पार्टी की ओर से जारी सूची में महिला, युवा, OBC, SC, ST, किसान और अल्पसंख्यक मोर्चा के लिए वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रीय प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नई नियुक्तियों को संगठन को और मजबूत करने तथा विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सात मोर्चों की जिम्मेदारी इन नेताओं को

बीजेपी की नई सूची के मुताबिक डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चा, हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चा, वैजयंत पांडा को OBC मोर्चा, संजय भाटिया को SC मोर्चा, सतीश पूनिया को ST मोर्चा, लाल सिंह आर्या को किसान मोर्चा और गजेंद्र पटेल को अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय प्रभारी बनाया गया है।

पार्टी संगठन में इन मोर्चों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। महिला, युवा, किसान, OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक मोर्चों के जरिए बीजेपी अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संगठनात्मक गतिविधियों को विस्तार देती है और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय मजबूत करती है।

मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों की कमान भी तय

राष्ट्रीय प्रभारियों की घोषणा से पहले बीजेपी ने विभिन्न मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों की नियुक्ति भी कर दी है। गुजरात से लोकसभा सांसद डॉ. हेमांग जोशी को युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ नेता रूप कुमारी चौधरी को महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।

इसके अलावा मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बंसीलाल गुर्जर को किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अमरपाल मौर्य को OBC मोर्चा, शिवेश कुमार राम को अनुसूचित जाति मोर्चा, मन्नालाल रावत को ST मोर्चा और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

चुनावी तैयारियों के बीच संगठन पर बड़ा फोकस

बीजेपी की इन नियुक्तियों को आगामी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय मोर्चे अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक वर्गों तक संगठन की पहुंच बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। नई टीम के जरिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाने और सामाजिक समूहों के बीच पार्टी की गतिविधियों को मजबूत करने पर जोर दिया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों में संगठनात्मक मजबूती बीजेपी की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। ऐसे में राष्ट्रीय मोर्चों के प्रभारियों और अध्यक्षों की नई टीम से जमीनी संगठन को गति देने की उम्मीद की जा रही है।

वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी, क्या है BJP का बड़ा संदेश?

सातों मोर्चों में वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी देकर बीजेपी ने सामाजिक समीकरणों और संगठन के विस्तार पर अपना फोकस स्पष्ट किया है। यह बदलाव केवल पदों के फेरबदल तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके जरिए पार्टी महिला, युवा, किसान और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच अपनी संगठनात्मक पकड़ को और मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।

अब राष्ट्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों की नई टीम अपने-अपने मोर्चों की गतिविधियों को आगे बढ़ाएगी। आने वाले समय में इन मोर्चों की सक्रियता बीजेपी की संगठनात्मक और चुनावी रणनीति की दिशा को भी प्रभावित कर सकती है।

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