भोपाल, 04 सितंबर। Fake IAS-IPS Network : मध्य प्रदेश में सरकारी अफसर बनकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले फर्जी IAS-IPS नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पिछले करीब एक महीने में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे पांच मामले सामने आए हैं। आरोपी खुद को IAS, IPS, इनकम टैक्स अधिकारी या केंद्र सरकार के बड़े पदों पर तैनात अधिकारी बताकर लोगों को सरकारी नौकरी, टेंडर और अन्य सुविधाएं दिलाने का झांसा देते थे। महंगे कपड़े, लग्जरी गाड़ियां, फर्जी सरकारी दस्तावेज और अधिकारियों जैसा रौब दिखाकर आरोपी लोगों का भरोसा जीतते थे। इसके बाद नौकरी या सरकारी काम दिलाने के नाम पर लाखों रुपये वसूल लिए जाते थे।
‘भारत सरकार’ लिखी कार और फर्जी CBI आईडी से रौब
ग्वालियर और भोपाल से सामने आए मामले में तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुधांशु पर फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करने के आरोप हैं। तृप्ति खुद को मध्य प्रदेश टूरिज्म में एडिशनल हेड या वरिष्ठ IAS अधिकारी बताती थी।
पुलिस की जांच में किराए की इनोवा कार, जिस पर ‘भारत सरकार’ लिखा था, फर्जी CBI आईकार्ड, सरकारी लेटरहेड और महंगे आईफोन जैसी चीजें सामने आईं। आरोप है कि गिरोह ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से 10-10 लाख रुपये तक लिए।
फर्जी IPS की पोल जॉइनिंग लेटर की गलती से खुली
दूसरा मामला फर्जी IPS ऋषि कुमार यादव से जुड़ा है। आरोपी खुद को 2016 बैच का IPS अधिकारी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में जॉइंट इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताता था। बताया गया कि उसने UPSC की तैयारी कर रहे कई छात्रों को आयकर विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और उनसे 8 लाख रुपये तक की रकम ऐंठी। लेकिन उसके फर्जी जॉइनिंग लेटर में हुई स्पेलिंग की गलतियों ने पूरा खेल बिगाड़ दिया। दस्तावेज पर शक होने के बाद शिकायत की गई और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
इंदौर से उज्जैन और नरसिंहपुर तक फैला फर्जी अफसरों का खेल
यह नेटवर्क केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। इंदौर में हिमांशु पांचाल नाम के आरोपी पर खुद को IAS ‘राज सोनी’ बताकर लोगों को प्रभावित करने का आरोप है। वह अपने घर के बाहर इसी नाम की नेमप्लेट भी लगाए हुए था।
एक होटल में खाना खाने के बाद बिना भुगतान किए रौब दिखाने की सूचना मिलने पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। वहीं नरसिंहपुर में मैट्रिमोनियल साइट के जरिए खुद को IAS डॉक्टर बताकर एक महिला डॉक्टर से 3 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया। उज्जैन में भी एक व्यक्ति के केंद्र सरकार का जॉइंट सेक्रेटरी बनकर VIP सुविधाओं का फायदा उठाने का मामला सामने आया।
2021 से सक्रिय होने का दावा, विधानसभा परिसर का वीडियो भी वायरल
तृप्ति राजपूत और उसके सहयोगियों के नेटवर्क के बारे में बताया गया है कि यह गिरोह 2021 से सक्रिय था। आरोपियों पर लोगों से पैसे लेकर उन्हें सरकारी अधिकारी बनवाने का झांसा देने का आरोप है। इस बीच विधानसभा परिसर के अंदर का एक वीडियो भी वायरल होने की बात सामने आई है। पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े प्रमुख चेहरों पर कार्रवाई की है। इन मामलों ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि फर्जी पहचान और सरकारी पद का रौब दिखाकर ठगी करने वाले लोग किस तरह आम लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी से रहें सावधान
फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर ठगी के इन मामलों से यह साफ है कि केवल वर्दी, सरकारी गाड़ी, आईडी कार्ड या पदनाम देखकर किसी व्यक्ति पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। नौकरी, टेंडर या सरकारी काम दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वाले लोगों के दस्तावेज और दावों की आधिकारिक स्तर पर जांच करना जरूरी है।












