लखनऊ, 04 सितंबर। Akash Anand News : उत्तर प्रदेश की सियासत में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नेता आकाश आनंद को लेकर नया सियासी घटनाक्रम सामने आया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर आकाश आनंद से पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी वापस लेते हुए कहा है कि वह अभी राजनीतिक रूप से पूरी तरह परिपक्व नहीं हुए हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में शामिल होने का खुला ऑफर दे दिया। इस घटनाक्रम के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मायावती ने फिर छीनी आकाश आनंद की बड़ी जिम्मेदारी
बसपा की राष्ट्रीय बैठक में मायावती ने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद को फिलहाल पार्टी में काम करने की अनुमति रहेगी, लेकिन उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। मायावती ने इसके पीछे आकाश की राजनीतिक अपरिपक्वता का हवाला दिया। उन्होंने पार्टी संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि परिवार के सदस्यों को पार्टी के काम में सहयोग की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने या चुनाव लड़ाने के पक्ष में कांशीराम नहीं थे।
मायावती के फैसले के बाद आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से राष्ट्रीय संयोजक का उल्लेख भी हटा दिया और खुद को बसपा कार्यकर्ता के रूप में पेश किया। फिलहाल उनकी पार्टी में भूमिका बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी से हटकर सामान्य कार्यकर्ता की बताई जा रही है।
संजय निषाद का आकाश आनंद को खुला ऑफर
मायावती के फैसले के तुरंत बाद निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में आने का न्योता दिया। संजय निषाद ने युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की जरूरत बताते हुए कहा कि जिस दिशा में युवा चलते हैं, उसी दिशा में जमाना चलता है। उन्होंने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में आकर बड़ी जिम्मेदारी संभालने का ऑफर दिया।
संजय निषाद ने बसपा की मौजूदा स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि किसी युवा नेता को काम करने और अपनी क्षमता साबित करने का अवसर ही नहीं मिलेगा, तो वह राजनीतिक रूप से परिपक्व कैसे होगा। उनके इस बयान को मायावती के फैसले पर सीधे राजनीतिक तंज के तौर पर देखा जा रहा है।
कभी मायावती के घोषित उत्तराधिकारी थे आकाश
आकाश आनंद को लंबे समय तक मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता रहा। 2017 के बाद वह धीरे-धीरे मायावती के साथ राजनीतिक मंचों पर सक्रिय हुए और 2019 में उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण संगठनात्मक भूमिका मिली। 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आकाश ने बसपा के लिए चुनाव प्रचार किया और कई रैलियों में भाजपा तथा अन्य विपक्षी दलों पर तीखे हमले किए।
हालांकि, उनके राजनीतिक सफर में कई बार उतार-चढ़ाव आए। मई 2024 में मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक और राजनीतिक उत्तराधिकारी की भूमिका से हटाया था, लेकिन जून 2024 में उन्हें फिर जिम्मेदारी दी गई। मार्च 2025 में उन्हें दोबारा सभी पदों से हटाकर पार्टी से निष्कासित किया गया, जिसके बाद अप्रैल 2025 में उनकी वापसी हुई और मई 2025 में उन्हें फिर बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई। अब सितंबर 2026 में एक बार फिर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी से दूर कर दिया गया है।
शादी और पार्टी विवाद के बाद बदला सियासी समीकरण
आकाश आनंद की शादी बसपा के वरिष्ठ नेता रहे अशोक सिद्धार्थ की बेटी से हुई थी। इसके बाद पार्टी के भीतर विवादों की चर्चा तेज हुई और मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर पार्टी के काम में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए उन्हें संगठन से बाहर कर दिया था। बाद में आकाश आनंद भी पार्टी की मुख्य जिम्मेदारियों से दूर हुए। हालांकि, माफी और वापसी के बाद उन्हें दोबारा संगठन में अहम भूमिका मिली थी।
अब एक बार फिर मायावती द्वारा आकाश को बड़ी जिम्मेदारी से दूर किए जाने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खास तौर पर इसलिए क्योंकि 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सामने है और इसी समय संजय निषाद की ओर से आया खुला ऑफर सियासी चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल आकाश आनंद ने निषाद पार्टी में जाने को लेकर कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है।
2027 चुनाव से पहले क्या नया मोड़ लेगी आकाश आनंद की राजनीति?
मायावती के ताजा फैसले ने आकाश आनंद की राजनीतिक भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ बसपा नेतृत्व उन्हें अभी बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ दूसरे राजनीतिक दल उनके युवा चेहरे और बहुजन राजनीति में संभावित प्रभाव को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आकाश आनंद बसपा में सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय रहेंगे या 2027 से पहले अपनी राजनीति के लिए कोई नया रास्ता चुनेंगे? अभी इसका जवाब आकाश आनंद के अगले राजनीतिक कदम पर निर्भर करेगा।












