लखनऊ, 04 सितंबर।Government Doctors Action : उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ड्यूटी से लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और चिकित्सीय जिम्मेदारियों में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के बाद 26 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। वहीं, वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी और चिकित्सीय कार्यों में लापरवाही के आरोप में 9 अन्य डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर की गई है।
ड्यूटी से लंबे समय तक गायब थे डॉक्टर
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, जिन डॉक्टरों पर कार्रवाई हुई है, उनमें विशेषज्ञ चिकित्सक और मेडिकल ऑफिसर दोनों शामिल हैं। ये डॉक्टर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात थे। लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के मामलों को विभाग ने गंभीरता से लिया, क्योंकि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की उपलब्धता सीधे मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी होती है। समीक्षा के बाद ऐसे मामलों में सेवा समाप्ति का फैसला लिया गया।
9 डॉक्टरों पर भी विभागीय जांच के आदेश
26 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त करने के अलावा 9 अन्य डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इन डॉक्टरों पर वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और चिकित्सीय कार्यों में लापरवाही बरतने के आरोप हैं। इन मामलों में विभागीय प्रक्रिया के तहत जांच आगे बढ़ेगी और जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कई जिलों के डॉक्टरों पर हुई कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कार्रवाई की जद में प्रदेश के कई जिलों में तैनात डॉक्टर आए हैं। इनमें फिरोजाबाद, अलीगढ़, गाजीपुर, हरदोई, महोबा, बुलंदशहर, लखनऊ, बलरामपुर, मथुरा, मिर्जापुर, झांसी, बरेली, गोरखपुर, सहारनपुर, मुरादाबाद, चंदौली, मैनपुरी, मऊ, सुल्तानपुर और मुजफ्फरनगर जैसे जिले शामिल हैं। कार्रवाई किसी एक पद तक सीमित नहीं रही, बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल ऑफिसरों के मामलों की भी समीक्षा की गई।
OPD-IPD सेवाओं की निगरानी पर जोर
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अधिकारियों को सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही OPD और IPD सेवाओं पर भी नजर रखने को कहा गया है, ताकि मरीजों को इलाज के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। सरकार का जोर इस बात पर है कि अस्पतालों में तैनात चिकित्सक अपनी जिम्मेदारियों का समय पर और पूरी गंभीरता से निर्वहन करें।
मरीजों को समय पर इलाज देना सरकार की प्राथमिकता
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की पहली जिम्मेदारी मरीजों को समय पर बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। ड्यूटी से अनुपस्थित रहना या चिकित्सीय जिम्मेदारियों की अनदेखी को गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। सरकार ने संकेत दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आगे भी निगरानी जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।












