Korba RES Tender: 8 करोड़ की निविदा पर अचानक ब्रेक! SDO-EE विवाद ने खोले दो साल पुराने ‘मैनेजमेंट’ के राज?

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Korba RES Tender: 8 करोड़ का टेंडर निरस्त होने से SDO-EE विवाद और कथित टेंडर मैनेजमेंट पर सवाल उठे। जानिए पूरे मामले की अंदरूनी कहानी।

कोरबा। Korba RES Tender: ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) संभाग कोरबा में करोड़ों के टेंडर को लेकर अंदरखाने चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। टेंडर मैनेज करने के बदले मिलने वाली कथित रकम के बंटवारे को लेकर SDO और तत्कालीन EE के बीच विवाद इतना बढ़ा कि करीब 8 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य का टेंडर ही निरस्त होने की बात कही जा रही है। मामला सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दो साल से चल रहा था ‘मैनेजमेंट’ का खेल?

सूत्रों के मुताबिक, RES विभाग में पिछले करीब दो वर्षों से टेंडर प्रक्रिया को कथित तौर पर प्रभावित करने का खेल चल रहा था। आरोप है कि चुनिंदा ठेकेदारों को काम दिलाने के लिए टेंडर मैनेज किए जाने और इसके एवज में कथित लेन-देन की चर्चा विभागीय गलियारों में लंबे समय से थी।

बताया जा रहा है कि इसी कथित टेंडर मैनेजमेंट से मिलने वाली रकम के बंटवारे को लेकर तत्कालीन कार्यपालन अभियंता (EE) और एक SDO के बीच टकराव की स्थिति बन गई। विवाद बढ़ा तो इसका असर सीधे करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य की निविदा पर पड़ा।

रकम के बंटवारे का विवाद या प्रशासनिक कारण?

8 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य की निविदा निरस्त होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसी क्या वजह रही कि करोड़ों रुपये के काम की प्रक्रिया को बीच में ही रोकना पड़ा?

विभागीय सूत्र इसे अंदरूनी विवाद से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि आधिकारिक तौर पर निविदा निरस्त करने की वजह क्या बताई जाती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। यदि टेंडर मैनेजमेंट और कथित रकम के लेन-देन के आरोप सही हैं तो यह सिर्फ एक टेंडर का मामला नहीं, बल्कि पूरी निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

अब जांच की जरूरत

करोड़ों के सरकारी काम से जुड़ा मामला होने के कारण पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठ सकती है। आखिर 8 करोड़ की निविदा क्यों निरस्त हुई, टेंडर प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था और कथित रकम के बंटवारे को लेकर SDO-EE के बीच विवाद की असल वजह क्या थी?

इन सवालों के जवाब विभागीय जांच के बाद ही साफ होंगे। फिलहाल 8 करोड़ की निविदा का निरस्त होने की सुगबुगाहट और इसके पीछे सामने आ रही अंदरूनी खींचतान ने RES कोरबा की टेंडर प्रक्रिया पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

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