Divya Mittal Resignation : 11 साल की नौकरी में 8 जिलों में पोस्टिंग, इस्तीफे में सिर्फ देवरिया-मिर्जापुर का जिक्र, आखिर क्या है वजह?

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Divya Mittal Resignation

लखनऊ, 31 अगस्त। Divya Mittal Resignation : IAS अधिकारी दिव्या मित्तल का 11 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा इन दिनों चर्चा में है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों और महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, इस्तीफे के साथ साझा किए गए भावुक संदेश में उन्होंने खास तौर पर देवरिया और मिर्जापुर का जिक्र किया।

दिव्या मित्तल ने देवरिया को लेकर लिखा कि इस जिले ने उन्हें सही के साथ खड़े रहना सिखाया, जबकि मिर्जापुर ने उन्हें यह समझाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बल्कि सिर्फ एक राय है। यही वजह है कि उनकी विदाई पोस्ट में इन दोनों जिलों का जिक्र सबसे ज्यादा चर्चा में है।

मेरठ से शुरू हुआ प्रशासनिक सफर, कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं

दिव्या मित्तल की प्रशासनिक यात्रा मेरठ में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के तौर पर शुरू हुई। उन्होंने 27 नवंबर 2015 को मेरठ में कार्यभार संभाला और मई 2017 तक जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद उन्हें गोंडा में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) बनाया गया।

अप्रैल 2018 में उनकी पोस्टिंग कानपुर नगर में हुई, जहां उन्होंने UPSIDC से जुड़ी जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद फरवरी 2019 में उन्हें बरेली विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया। सितंबर 2020 में उन्होंने संत कबीर नगर की जिलाधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।

इसके बाद सितंबर 2022 में उनका तबादला मिर्जापुर हुआ और यहीं से उनके प्रशासनिक सफर का एक ऐसा अध्याय शुरू हुआ, जिसे उन्होंने बाद में अपने इस्तीफे के संदेश में विशेष तौर पर याद किया।

मिर्जापुर ने सिखाया- ‘असंभव’ सिर्फ एक राय है

दिव्या मित्तल करीब एक साल तक मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहीं। अपने विदाई संदेश में उन्होंने मिर्जापुर के अनुभवों को बेहद भावुक अंदाज में याद किया। उन्होंने लिखा कि मिर्जापुर ने उन्हें सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। उन्होंने मां विंध्यवासिनी का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनके चरणों में बैठकर उन्होंने महसूस किया कि शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास और आशीर्वाद से आती है।

उन्होंने लहुरियादह की पहाड़ी की एक बुजुर्ग महिला से जुड़ा अनुभव भी साझा किया। उनके मुताबिक गांव में पहली बार पानी पहुंचने पर बुजुर्ग महिला ने कुछ नहीं कहा, बल्कि कांपते हाथों से उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। दिव्या मित्तल ने इस पल को किसी सरकारी उपलब्धि से भी बड़ा बताया।

देवरिया ने सिखाया- सही के साथ खड़ा होना कर्तव्य है

मिर्जापुर के बाद सितंबर 2023 में दिव्या मित्तल को प्रतीक्षारत किया गया। फरवरी 2024 में उन्हें लखनऊ में CEO, UPRRDA की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद जुलाई 2024 में उन्हें देवरिया का जिलाधिकारी बनाया गया।

करीब पौने दो साल तक देवरिया की जिम्मेदारी संभालने के बाद मई 2026 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव बनाया गया। यही उनकी आखिरी दर्ज प्रशासनिक तैनाती रही।

अपने इस्तीफे के संदेश में उन्होंने देवरिया को याद करते हुए लिखा कि इस जिले ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि कर्तव्य है। उन्होंने अपनी प्रशासनिक सेवा की सबसे बड़ी उपलब्धि उन लोगों की जिंदगी में बदलाव को बताया, जिन्हें जमीन का हक मिला, दिव्यांग लोगों को सम्मान से जीने का अवसर मिला या किसानों के खेतों तक पानी पहुंचा।

इस्तीफे की वजह पर दिव्या मित्तल ने खुद तोड़ी चुप्पी

इस्तीफे के बाद उठ रहे सवालों पर दिव्या मित्तल ने खुद स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका फैसला किसी दबाव या अचानक पैदा हुए किसी हालात का परिणाम नहीं है, बल्कि काफी सोच-विचार के बाद लिया गया निर्णय है। उन्होंने कहा कि IAS की नौकरी उनके जीवन का सिर्फ एक चैप्टर है, पूरी जिंदगी नहीं। उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं, परिवार और रुचियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। भविष्य में वह लेखन, शिक्षण और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की दिशा में काम कर सकती हैं। हालांकि, अपने अगले कदम को लेकर उन्होंने अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

दिव्या मित्तल की निजी जिंदगी भी उनके प्रशासनिक सफर की तरह खास रही है। उनके पति और पूर्व IAS अधिकारी गगनदीप सिंह ढिल्लों ने भी 2022 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में संयुक्त महानिदेशक के पद से इस्तीफा दिया था। दोनों ने IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर जैसी संस्थाओं से शिक्षा हासिल की और विदेश में कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने के बाद भारत लौटकर सिविल सेवा को चुना। दिव्या मित्तल ने अपने दूसरे प्रयास में वर्ष 2012 में सिविल सेवा परीक्षा में 68वीं रैंक हासिल की थी। अब 11 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद उनका इस्तीफा और देवरिया-मिर्जापुर से जुड़ी उनकी भावुक यादें चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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