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Breaking: NTPC लारा की राख को जाना था NHAI दुर्ग-पाटन… लेकिन खाली हो गई कोसमनारा के पास! पर्यावरण विभाग ने पकड़ी गड़बड़ी, 3.53 लाख का जुर्माना… 


NTPC Lara Fly Ash Case रायगढ़। NTPC लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला फ्लाई ऐश (राख) के परिवहन में भारी गड़बड़ियां उजागर हुई है। पर्यावरण संरक्षण मंडल की जांच में सामने आया है कि जिस फ्लाई ऐश को NHAI के दुर्ग-पाटन सड़क निर्माण कार्य में उपयोग के लिए भेजा जाना था, वह निर्धारित स्थल तक पहुंचने के बजाय कोसमनारा के पास खाली कर दी गई। इस खुलासे के बाद पर्यावरण विभाग ने NTPC प्रबंधन पर 3,53,760 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) अधिरोपित कर दी है।

 

शिकायत मिलने के बाद 21 जुलाई 2026 को पर्यावरण संरक्षण मंडल की संयुक्त टीम ने मौके पर जांच की। जांच के दौरान तीन वाहनों के माध्यम से फ्लाई ऐश के परिवहन में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। विभाग ने पाया कि परिवहन निर्धारित शर्तों और पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप नहीं किया गया।

 

जांच में यह भी सामने आया कि करीब 235.84 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का परिवहन नियमों के विपरीत हुआ। इसी आधार पर 1500 रुपये प्रति टन की दर से कुल 3,53,760 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय की गई। विभाग ने NTPC को 15 दिनों के भीतर यह राशि जमा करने, अवैध रूप से डाली गई फ्लाई ऐश को तत्काल हटाने तथा तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। समय सीमा का पालन नहीं होने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

 

करोड़ों की राख हेराफेरी की आशंका

 

हालांकि इस कार्रवाई में केवल तीन वाहनों का मामला सामने आया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक खेप की गड़बड़ी है या फिर लंबे समय से फ्लाई ऐश परिवहन के नाम पर बड़ा खेल चल रहा था?

 

सूत्रों की मानें तो यदि NHAI के नाम पर निकलने वाली राख रास्ते में ही खाली की जा रही थी, तो करोड़ों रुपये की फ्लाई ऐश के उपयोग और परिवहन पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। यदि विस्तृत जांच कराई जाती है तो कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

 

NTPC और परिवहन एजेंसियों की भूमिका पर सवाल

 

इस पूरे मामले में यह भी जांच का विषय है कि फ्लाई ऐश परिवहन की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी? वाहनों की GPS मॉनिटरिंग, डिस्पैच रिकॉर्ड, गंतव्य स्थल पर प्राप्ति और उपयोग का सत्यापन किया गया था या नहीं? यदि राख निर्धारित परियोजना तक नहीं पहुंची तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।

 

अब पर्यावरण विभाग की कार्रवाई के बाद निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच केवल जुर्माने तक सीमित रहेगी या फिर फ्लाई ऐश परिवहन से जुड़े पूरे नेटवर्क की गहन जांच होगी। यदि ऐसा हुआ तो करोड़ों रुपये के संभावित खेल का पर्दाफाश होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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