
कोरबा। Korba Wood Smuggling Case शहर के बहुचर्चित लकड़ी तस्करी मामले में आरोपी ‘पुष्पा’ उर्फ सुनील गुप्ता को बड़ा झटका लगा है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अब आरोपी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। मामला CSEB आवासीय कॉलोनी से लाखों रुपये मूल्य के साल और सागौन की बेशकीमती लकड़ी को सरकारी डिपो तक पहुंचने से पहले ही गायब कर देने का है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
204 पेड़ों की अनुमति… लेकिन शुरुआती कटाई में ही गायब हो गई लकड़ी
जानकारी के मुताबिक, CSEB कॉलोनी में सूख चुके और लोगों के लिए खतरा बन रहे 204 पेड़ों की कटाई की अनुमति वन विभाग ने राजस्व विभाग और CSEB के साथ संयुक्त प्रक्रिया के तहत दी थी। नियम साफ था कि कटाई के बाद पूरी लकड़ी सरकारी डिपो में जमा होगी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि शुरुआती चरण में केवल सात पेड़ों की कटाई हुई और उसी दौरान साल व सागौन के कीमती लट्ठे रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। इस घटना ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।
सरकारी लकड़ी बाहर बेचने का आरोप, CCTV फुटेज भी जांच में
वन विभाग का आरोप है कि आरोपी सुनील गुप्ता ने कटे हुए लट्ठों को वाहन में लोड कर जिले से बाहर भेज दिया और निजी डिपो में बेच दिया। जांच में CCTV फुटेज भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल किए गए हैं। विभाग का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने लकड़ी हटाने की बात स्वीकार की है। अब पुलिस और वन विभाग चोरी गई लकड़ी की बरामदगी में जुटे हुए हैं।
सबसे बड़ा सवाल… जिम्मेदारी किसे और क्यों?
इस पूरे मामले ने इसलिए भी सनसनी फैला दी है क्योंकि चर्चा है कि पेड़ों की कटाई का काम ऐसे व्यक्ति को सौंपा गया, जिसका नाम पहले भी लकड़ी तस्करी के मामलों में सामने आ चुका है। यदि यह सही है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ऐसे व्यक्ति को सरकारी काम कैसे सौंपा गया और निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों रही?
कोर्ट से राहत नहीं, जांच अभी बाकी
वन विभाग की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर सुनील गुप्ता को गिरफ्तार किया था। अब CJM कोर्ट द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद आरोपी को जेल में ही रहना होगा। उधर, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी गई बेशकीमती लकड़ी कहां पहुंची, इसमें और कौन-कौन शामिल हैं, तथा क्या इस पूरे खेल में किसी और की भी भूमिका रही है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि लाखों रुपये की सरकारी लकड़ी आखिर बरामद होती है या नहीं, और इस बहुचर्चित मामले में जांच की आंच किन-किन लोगों तक पहुंचती है।






