
कोरबा। Korba District Panchayat Building जिस जिले में हर साल विकास योजनाओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये के DMF (जिला खनिज न्यास) फंड खर्च होने का दावा किया जाता है, वहीं जिला पंचायत का अपना भवन बदहाली की कहानी बयां कर रहा है। हालत ऐसी है कि कहीं छत का प्लास्टर झड़ रहा है, तो कहीं बारिश का पानी छत से टपक रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब व्यवस्था अपने ही कार्यालय की मरम्मत नहीं कर पा रही, तो विकास के बड़े-बड़े दावों का हाल क्या होगा?
बारिश के मौसम में जिला पंचायत भवन की तस्वीरें सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। कर्मचारियों और आने वाले ग्रामीणों को जगह-जगह टपकते पानी और जर्जर दीवारों से दो-चार होना पड़ रहा है। भवन के कई हिस्सों में प्लास्टर उखड़ चुका है, जिससे हादसे की आशंका भी बनी हुई है।
चर्चा है कि फाइलों में विकास की इमारतें तेजी से खड़ी हो रही हैं, लेकिन विकास का जिम्मा संभालने वाला कार्यालय खुद मरम्मत का इंतजार कर रहा है। करोड़ों के विकास कार्यों की निगरानी करने वाली व्यवस्था अपने ही भवन की दीवारें नहीं बचा पा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिला पंचायत भवन की यह स्थिति है, तो दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भवनों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस बदहाल भवन की सुध लेते हैं या फिर अगली बारिश तक प्लास्टर और सरकारी दावे, दोनों इसी तरह झड़ते रहेंगे।






