रायपुर में नया बवाल: कोल–DMF घोटाले में ‘फर्जी बयान’ का धमाका, EOW पर गंभीर सवाल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल और जिला खनिज DMF निधि घोटाले में अब जांच एजेंसी की भूमिका ही कटघरे में आ गई है। मामला इस बार सीधे बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पर अटका है और आरोप इतने गंभीर हैं कि पूरे सिस्टम में हलचल मच गई है।

अदालत के बाहर टाइप हुआ 164 का बयान!

सूत्रों के मुताबिक, घोटाले के अहम आरोपी निखिल चंद्राकर का बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत न्यायालय में दर्ज होना था। लेकिन सामने आए दस्तावेजों से संकेत मिल रहे हैं कि बयान अदालत कक्ष के बजाय किसी निजी कंप्यूटर पर टाइप कराया गया।

अगर यह सच साबित होता है तो यह सीधा-सीधा न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। नियम साफ कहते हैं कि इस तरह का बयान न्यायिक अधिकारी की मौजूदगी में, अदालत परिसर में ही तैयार और हस्ताक्षरित होना चाहिए ताकि उसकी प्रमाणिकता पर कोई संदेह न रहे।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला

गड़बड़ी उजागर होते ही बचाव पक्ष ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जांच एजेंसी ने जानबूझकर न्यायालय को भ्रमित करने की कोशिश की और जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता फैजल रिजवी ने इसे केवल तकनीकी चूक नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था से खिलवाड़ बताया है। उनका आरोप है कि दस्तावेजों से छेड़छाड़ और गलत जानकारी पेश करने की आशंका है। उन्होंने पूरे प्रकरण की फॉरेंसिक जांच की मांग की है ताकि यह साफ हो सके कि बयान कहां और किसके निर्देश पर तैयार हुआ।

अफसरों पर सीधी शिकायत

इस मामले में एसीबी के आईजी अमरेश मिश्रा, एएसपी चंदेश ठाकुर और डीएसपी राहुल शर्मा के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है। आरोप है कि इन अधिकारियों की निगरानी में ही बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी हुई।

कोर्ट सख्त, 25 अक्टूबर तक जवाब तलब

न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों को 25 अक्टूबर 2025 तक उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा है। साथ ही संकेत दिया है कि यदि फॉरेंसिक जांच में अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

एजेंसियों में खलबली

मामला सामने आते ही EOW और ACB के भीतर बेचैनी बढ़ गई है। उच्च न्यायालय और सतर्कता तंत्र दोनों ने संज्ञान ले लिया है। सरकार भी पूरी रिपोर्ट मांगने की तैयारी में है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह महज लापरवाही थी या किसी बड़े खेल की परत खुलने वाली है। जवाब आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही से तय होगा, लेकिन फिलहाल इस खुलासे ने राज्य के सबसे चर्चित आर्थिक घोटालों में नई आग लगा दी है।

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